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एकेटीयू में बोलीं राज्यपाल आनंदी बेन- मैंने अपने घर में ही रोका बाल विवाह
Wed, 16 Oct 2019 04:36 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Wed, 16 Oct 2019 04:36 PM IST
सार
- 66 मेधावियों को पदक, 62 को पीएचडी, 58 हजार को मिलेगी उपाधि
- राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल 30 स्कूली बच्चों को भी करेंगी सम्मानित
- मुख्य अतिथि जल पुरुष राजेंद्र सिंह को विवि देगा डीलिट की मानद उपाधि
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दीक्षांत समारोह
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में 17वें दीक्षांत समारोह का आयोजन बुधवार को किया गया। समारोह में एकेजी कॉलेज, गाजियाबाद की बीटेक कंप्यूटर साइंस की छात्रा साक्षी सिंह को चांसलर मेडल प्रदान किए गए। साक्षी के साथ 66 मेधावियों को स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक, 62 विद्यार्थियों को पीएचडी और 58,699 विद्यार्थियों को उपाधि दी गईं।
इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि मेरे पिता ने कभी बाल विवाह को बढ़ावा नहीं दिया। इसके बाद भी मेरे बड़े भाई अपने 12वीं में पढ़ रहे लड़के की शादी करने जा रहे थे। मुझे जानकारी हुई तो मैंने ऐसा करने से मना किया। जब वो नहीं माने तो मैं खुद थाने गई और इसकी शिकायत की। वहां से पुलिस आई और मेरे भतीजे का बाल विवाह रुकवाया। उन्होंने सभी से अपील की कि कभी भी बच्चों का बाल विवाह न करें।
सुबह 11 बजे से विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी बहुउद्देश्यीय सभागार में होने वाले दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि जल पुरुष राजेंद्र सिंह रहे। उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से डीलिट की मानद उपाधि प्रदान की गई। प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी व प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा राधा एस चौहान विशिष्ट अतिथि रहे।
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इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि मेरे पिता ने कभी बाल विवाह को बढ़ावा नहीं दिया। इसके बाद भी मेरे बड़े भाई अपने 12वीं में पढ़ रहे लड़के की शादी करने जा रहे थे। मुझे जानकारी हुई तो मैंने ऐसा करने से मना किया। जब वो नहीं माने तो मैं खुद थाने गई और इसकी शिकायत की। वहां से पुलिस आई और मेरे भतीजे का बाल विवाह रुकवाया। उन्होंने सभी से अपील की कि कभी भी बच्चों का बाल विवाह न करें।
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सुबह 11 बजे से विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी बहुउद्देश्यीय सभागार में होने वाले दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि जल पुरुष राजेंद्र सिंह रहे। उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से डीलिट की मानद उपाधि प्रदान की गई। प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी व प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा राधा एस चौहान विशिष्ट अतिथि रहे।
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर दीक्षा कमजोरों को करना चाहती हैं शिक्षित
समारोह में 1,184 विद्यार्थी शामिल होंगे जिन्होंने दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया। समारोह में पहली बार 30 स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। इन्हें राज्यपाल ने सम्मानित किया। इससे पहले मंगलवार को कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में जानकीपुरम विस्तार स्थित परिसर में दीक्षांत समारोह का पूर्वाभ्यास किया गया। इसमें विद्या परिषद, कार्य परिषद के सदस्य व डीन शामिल हुए।
एकेटीयू का चांसलर मेडल पाने वाली एकेजी कॉलेज गाजियाबाद की छात्रा दीक्षा सिंह का कैंपस प्लेसमेंट में कोयंबटूर की एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर चयन हुआ। दीक्षा वहीं नौकरी कर रही हैं। मूल रूप से गोरखपुर जिले की रहने वाली दीक्षा ने ‘अमर उजाला’ से फोन पर बातचीत में कहा, मैं कुछ दिनों की नौकरी के बाद सिविल सर्विस सेवा की तैयारी करूंगी।
दीक्षा ने कहा, "मैं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए काम करना चाहती हूं। मैंने स्कूल के समय से ही सोचा था कि मुझे इंजीनियर बनना है। इसके लिए मेहनत की और सफलता पाई।"
दीक्षा के पिता देवेंद्र प्रताप सिंह स्कूल में शिक्षक और मां पुष्पा गृहिणी हैं। दीक्षा ने कहा कि शिक्षकों ने मेरी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एकेटीयू का चांसलर मेडल पाने वाली एकेजी कॉलेज गाजियाबाद की छात्रा दीक्षा सिंह का कैंपस प्लेसमेंट में कोयंबटूर की एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर चयन हुआ। दीक्षा वहीं नौकरी कर रही हैं। मूल रूप से गोरखपुर जिले की रहने वाली दीक्षा ने ‘अमर उजाला’ से फोन पर बातचीत में कहा, मैं कुछ दिनों की नौकरी के बाद सिविल सर्विस सेवा की तैयारी करूंगी।
दीक्षा ने कहा, "मैं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए काम करना चाहती हूं। मैंने स्कूल के समय से ही सोचा था कि मुझे इंजीनियर बनना है। इसके लिए मेहनत की और सफलता पाई।"
दीक्षा के पिता देवेंद्र प्रताप सिंह स्कूल में शिक्षक और मां पुष्पा गृहिणी हैं। दीक्षा ने कहा कि शिक्षकों ने मेरी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।