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बीबीएयू के दीक्षांत समारोह में थल सेनाध्यक्ष ने युवाओं को दिए सफलता के मंत्र, दिए स्वर्ण पदक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Updated Mon, 11 Nov 2019 07:53 PM IST
बीबीएयू दीक्षांत मेडलिस्ट के साथ थल सेनाध्यक्ष।
बीबीएयू दीक्षांत मेडलिस्ट के साथ थल सेनाध्यक्ष। - फोटो : amar ujala
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‘असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो तुम। कहां खामियां रह गईं, इस पर विचार करो तुम। मेहनत-लगन के साथ आगे बढ़े चलो तुम, फिर कभी पीछे मत देखो। हर नई चोटी पर परचम लहराए चलो तुम।’ थल सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने सोमवार को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के दीक्षांत समारोह में मेधावियों के बीच इन पंक्तियों का उल्लेख करते हुए युवाओं को असफलता से भी प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की सीख दी। उन्होंने 23 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किया। इस अवसर पर समारोह के विशिष्ट अतिथि डिक्की के संस्थापक अध्यक्ष व पद्मश्री मिलिंद कांबले को डीएससी की मानद उपाधि भी दी गई। कुलाधिपति प्रकाशचंद्र बरतुनिया ने समारोह की अध्यक्षता की।
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जनरल रावत ने कहा कि ये वे पंक्तियां हैं जो मुझे हमेशा उत्साहित करती रही हैं। याद रखें कि आपके आगे बहुत सी चुनौतियां हैं। विश्वविद्यालय से जब आप बाहर की दुनिया में कदम रखेंगे तो आपके सामने बहुत सी चुनौतियां आएंगी। उन चुनौतियों को पार पाने में आप सफल होंगे लेकिन कई बार असफलता भी मिलेगी। जब-जब आपको असफलता का सामना करना पड़े तो असफलता को ही अपनी प्रेरणा बनाकर आगे बढ़ें।

बीबीएयू के दीक्षांत समारोह में दक्षिण भारत का छात्र मुंगामुरी क्रांथि कुमार ड्रेस कोड (कुर्ता-पायजामा व पट्टा) की जगह जींस-शर्ट में पहुंचा। एमए समाजशास्त्र के छात्र क्रांथि कुमार को विभाग का सामान्य व कटेगरी गोल्ड मेडल के साथ आरडी सोनकर अवॉर्ड भी दिया जाना था। छात्र जेएनयू से एमफिल भी कर रहा है। किंतु दीक्षांत समारोह शुरू होने से पहले ही प्रोफेसर इंचार्ज सिक्योरिटी प्रो. गजानंद पांडेय पुलिस लेकर छात्र के पास पहुंचे। जहां विरोध के बीच छात्र को पकड़कर समारोह स्थल से बाहर कर दिया गया।

छात्र ने बताया कि उसे पुलिस वालों ने प्रॉक्टर कार्यालय ले जाकर कमरे में बंद कर दिया। शाम को दीक्षांत खत्म होने के बाद छोड़ा गया। उसने बताया, मैंने एक माह पहले कुलपति को ड्रेस कोड से संबंधित पत्र लिखा था। पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद मैं सामान्य ड्रेस में पहुंचा था। बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर भी कहते थे कि हर जाति-धर्म व क्षेत्र का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। जब सभी एक ड्रेस कोड में होंगे तो उनकी विविधता कैसे दिखेगी?
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दो सत्रों के 251 मेधावियों को मिला गोल्ड मेडल

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