छात्रसंघ चुनाव पर लखनऊ विश्वविद्यालय व शासन में मतभेद बरकरार
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छात्रसंघ चुनाव को लेकर शासन और लखनऊ विश्वविद्यालय के बीच मतभेद की स्थिति बरकरार है। इसका समाधान निकालने के लिए शनिवार को कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने राजभवन जाकर राज्यपाल राम नाईक से चर्चा की।
इसके बाद उन्होंने छात्रसंघ चुनाव की राह में आ रही अड़चनों और हाईकोर्ट में वर्गीकरण दाखिल करने के मामले से एक बार फिर अवगत कराया।
इतना ही नहीं राजभवन से आने के बाद कुलपति ने इस मामले की पूरी जानकारी और पूर्व में विवि द्वारा शासन को लिखे सभी पत्र राज्यपाल को भेजे।
उन्होंने राज्यपाल को फिर से बताया कि इस मामले में शासन की ओर से हाईकोर्ट में विवि का वर्गीकरण दाखिला किया जाना है, जिससे कि चुनाव कराए जा सकें। वहीं, दूसरी ओर प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा का अब भी यही कहना है कि वर्गीकरण विवि को दाखिल करना है।
अगस्त में ही चुनाव घोषित कराने का प्रयास
शारदा प्रताप ने कहा कि उनका प्रयास है कि अगस्त में ही छात्रसंघ चुनाव की तिथि घोषित कर प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। इसलिए प्रमुख सचिव को जल्द मामला निस्तारित करवाने के लिए कहा गया है।
उन्होंने बताया कि यह भी निर्देश दिए गए हैं कि चुनाव पूरी तरह से लिंगदोह कमेटी की संस्तुतियों के आधार पर ही हों। अराजक व असामाजिक तत्वों को उसमें शामिल न होने दिया जाए। जो भी संस्तुतियों का पालन न करे उसे तत्काल बाहर करके कार्रवाई की जाए।
शारदा प्रताप ने कहा कि आज छात्रसंघ चुनाव में एसेंबली चुनाव से अधिक खर्च होने लगा है। लाखों रुपये प्रत्याशी खर्च करता है। इसके लिए वह चंदे के नाम पर गुंडागर्दी से वसूली करता है जो नहीं होने दिया जाएगा।
प्रमुख सचिव-वीसी वार्ता कर सुलझाएं मुद्दा
अमर उजाला में पांच अगस्त को प्रकाशित खबर छात्रसंघ चुनाव पर एलयू व शासन आमने-सामने खबर पढ़कर उच्च शिक्षा मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार से मामले की पूरी जानकारी ली।
मंत्री के मुताबिक, प्रमुख सचिव ने उन्हें बताया कि हाईकोर्ट में चुनाव को लेकर कोई स्टे नहीं है। वर्गीकरण भी विवि को खुद ही दाखिल करना है।
शारदा प्रताप ने बताया कि विवि का कहना है कि वर्गीकरण शासन द्वारा दाखिल किया जाना है। इसीलिए प्रमुख सचिव से कहा गया है कि वह कुलपति से वार्ता कर इस मामले को सुलझाएं जिससे कि चुनाव हो सकें।