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लखनऊ विश्वविद्यालय को झटका, केंद्रीकृत प्रवेश से कॉलेजों ने मुंह मोड़ा

Sat, 03 Apr 2021 03:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 03 Apr 2021 03:45 PM IST
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Colleges are not interested in centralised admission process in Lucknow University.
लखनऊ विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से पिछले साल शुरू की गई केंद्रीकृत प्रवेश व्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है। एक साल में ही कॉलेजों ने इससे मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा मांगे गए आवेदन के लगभग एक महीने बीतने के बाद मात्र 24 कॉलेजों ने ही इसके लिए आवेदन किया है। वह भी सिर्फ लखनऊ जिले के, जबकि इस साल से विवि से रायबरेली, हरदोई, सीतापुर व लखीमपुर खीरी के जिले भी संबद्ध किए गए हैं।

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले साल बड़े-बड़े दावों के साथ कॉलेजों के लिए केंद्रीकृत प्रवेश व्यवस्था की शुरुआत की थी। बताया था कि इससे कॉलेजों को प्रवेश के लिए बेहतर विद्यार्थी मिलेंगे, क्योंकि विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए काफी आवेदन आते हैं। जबकि उन विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पाता है। ऐसे में एक ही प्लेटफॉर्म पर विद्यार्थी प्रवेश आवेदन करेंगे और उनको विवि के अलावा कॉलेजों में भी प्रवेश का विकल्प मिलेगा। इसके बाद पिछले साल लगभग 70 कॉलेज इस व्यवस्था से जुड़े। इसके लिए उन्होंने प्रोफेशनल कोर्सों के लिए एक लाख व सामान्य पाठ्यक्रम के लिए 50-50 हजार रुपये शुल्क भी दिया, लेकिन इसके सापेक्ष उन्हें विद्यार्थी नहीं मिले। वहीं कॉलेजों में प्रवेश भी काफी देरी तक चला। इस साल भी विवि ने 08 मार्च को एक निर्देश जारी कर कॉलेजों को केंद्रीकृत प्रवेश से जुड़ने के लिए आवेदन मांगे, जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च थी।
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विवि प्रशासन के अनुसार अब तक मात्र 24 कॉलेजों ने ही केंद्रीकृत प्रवेश व्यवस्था से जुड़ने के लिए आवेदन किया है। उन्होंने 60 कोर्सों की संबद्धता के लिए 57.42 लाख रुपये शुल्क दिया है। जबकि विवि से संबद्ध कॉलेजों की संख्या पांचों जिलों में 524 है। यानी मात्र 05 फीसदी कॉलेजों ने ही इसमें रुचि दिखाई है। कम आवेदन का बड़ा कारण पिछली बार विद्यार्थियों का न मिलना ही बताया जा रहा है।

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कोर्स की मान्यता एक,आवेदन शुल्क अलग-अलग

विवि प्रशासन द्वारा बीएससी बायो व मैथ्स कोर्स की मान्यता एक साथ दी जाती है। किंतु जब केंद्रीकृत प्रवेश के लिए आवेदन शुल्क लिया जा रहा है तो इसका शुल्क अलग से लिया जा रहा है। इसे लेकर भी काफी कॉलेज परेशान हैं। उनका कहना है कि विवि द्वारा इस व्यवस्था से जुड़ने के लिए लिया जा रहा शुल्क भी काफी अधिक है।

विद्यार्थी पसोपेश में, कॉलेजों के नाम सार्वजनिक नहीं
इस व्यवस्था को लेकर विवि की लेटलतीफी भी विद्यार्थियों के लिए मुसीबत बन रही है। विवि द्वारा प्रवेश आवेदन शुरू कर दिए गए, लेकिन कॉलेजों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए। जबकि कॉलेजों ने भी अपने यहां आवेदन शुरू कर दिए हैं। अब विद्यार्थी पसोपेश में हैं कि वे दोनों जगह आवेदन करें या सिर्फ लविवि में आवेदन से उनको कॉलेजों का विकल्प मिल जाएगा। विवि इस प्रक्रिया में शामिल कॉलेजों की सूची भी सार्वजनिक नहीं कर रहा है।

30 अप्रैल तक आवेदन तिथि बढ़ाई
काफी कम संख्या में संबद्धता आवेदन आने के बाद विवि प्रशासन ने इसके लिए आवेदन तिथि एक महीने बढ़ा दी है। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह की ओर से जारी सूचना में बताया गया है कि केंद्रीकृत प्रवेश व्यवस्था से जुड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन 30 अप्रैल तक किए जा सकते हैं। कॉलेज अपने पाठ्यक्रम विवरण, निर्धारित शुल्क आदि जमाकर निर्धारित प्रारूप पर इसकी सूचना 30 अप्रैल तक मेल कर सकते हैं।

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