फर्स्ट ईयर में एडमिशन दिया, ‘सेकेंड में कहा -परीक्षा नहीं दे सकतीं’
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बीए फर्स्ट ईयर में एडमिशन देने, पास होने पर सेकंड ईयर में पढ़ाने के बाद राजाजीपुरम के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल डिग्री कॉलेज ने एक छात्रा को यह कहते परीक्षा फॉर्म भरने से रोक दिया कि उसने कक्षा 12 में निर्धारित न्यूनतम अंकों से कम हासिल किए थे।
लिहाजा उसका एडमिशन गलत है। हाईकोर्ट ने एलयू को अंतरिम तौर पर छात्रा को नियमित विद्यार्थी के तौर पर परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
रबाब रिजवी ने याचिका में बताया कि कॉलेज में सत्र 2015-16 में मैंने बीए फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया था।
नियमित क्लास अटेंड करने के बाद परीक्षा दी और 54 प्रतिशत अंकों के साथ पास किया। सेकंड ईयर में सत्र 2016-17 के लिए आगे एडमिशन लिया। अब जब परीक्षा के लिए फॉर्म भरने का समय आया तो कॉलेज ने यह कहते हुए फॉर्म भरवाने से मना कर दिया कि क्लास 12 में मुझे 39.06 प्रतिशत ही अंक मिले थे जो रेग्युलर स्टूडेंट के तौर पर दाखिले के लिए निर्धारित न्यूनतम अंकों से कम है।
कोर्ट ने कहा-छात्रा की ओर से कोई गलती नहीं
याची का कहना है कि उसे फर्स्ट ईयर में दाखिला सभी दस्तावेज जांचने के बाद दिया गया था। अब सेकंड ईयर में आकर परीक्षा फॉर्म भरने से रोकना जायज नहीं है।
यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि रबाब का एडमिशन निर्धारित से कम अंकों पर हुआ है, इसलिए उसे परीक्षा देने से रोका जा रहा है। जस्टिस अनिल कुमार ने कहा कि रबाब को एडमिशन दिया गया था।
उसकी ओर से कोई गलती नहीं हुई है। यह वाजिब नहीं है कि उसे परीक्षा नहीं देने दिया जाए। उन्हाेंने निर्देश दिए कि अंतरिम उपाय के तौर पर रबाब को लखनऊ यूनिवर्सिटी की बीए सेकंड ईयर की परीक्षा नियमित विद्यार्थी के तौर पर देने दी जाए।
उसका परिणाम मामले की अगली सुनवाई तक रोका जाएगा। वहीं लखनऊ यूनिवर्सिटी ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार हफ्ते मांगे, जो उसे दिए गए।