उर्दू विवि में यूजी और पीजी में एडमिशन शुरू, सेमेस्टर के हिसाब से जमा होगी फीस
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए काफी प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में विवि ने विद्यार्थियों से एकमुश्त फीस के बजाय सेमेस्टर वाइज फीस लेने का फैसला किया है। नई व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2018-19 से लागू होगी।
विवि ने मार्च अंत में यूजी-पीजी कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। इसमें आवेदकों की संख्या बढ़ाने के लिए आवेदन शुल्क पिछले वर्ष की तुलना में आधी कर दी है।
इतना ही नहीं, विद्यार्थियों की जानकारी के लिए इंटर कॉलेजों में पोस्टर लगवाए गए हैं। साथ ही शहर में भी पंफलेट बंटवाए जा रहे हैं। विवि ने एमबीए व अन्य कोर्सों की फीस भी कम करने का प्रस्ताव दिया है।
इस क्रम में पिछले दिनों विवि की वित्त समिति की बैठक में विद्यार्थियों से वार्षिक शुल्क की जगह सेमेस्टर के अनुसार शुल्क लेने का निर्णय लिया गया है। वहीं री-एडमिशन शुल्क के बारे में दोबारा प्रस्ताव लाने को कहा गया है।
कुलपति प्रो. माहरूख मिर्जा ने कहा कि इस निर्णय से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। वहीं, अगर विद्यार्थी एक सेमेस्टर में फेल होता है और आगे पढ़ाई नहीं करना चाहता है तो उसका शुल्क बेकार नहीं जाएगा।
यूजी-पीजी में महीने भर में मिले 200 आवेदन
विवि की तमाम कोशिशों के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत नहीं बढ़ रही है। यूजी-पीजी में दाखिले के लिए महीने भर से आवेदन प्रक्रिया चल रही है, लेकिन विवि को अभी तक महज 200 आवेदन ही मिले हैं। हालांकि कुलपति प्रो. मिर्जा ने कहा कि अभी सभी बैंकों से जानकारी नहीं मिली है। आवेदन अभी जारी रहेंगे।
विवि में अधिकारियों के कई अहम पद खाली
विवि के रजिस्ट्रार एसके शुक्ला का तबादला कानपुर विश्वविद्यालय हो गया है। तब से यह पद खाली चल रहा है। इतना ही नहीं, परीक्षा नियंत्रक का पद भी काफी समय से खाली है। जबकि वित्त अधिकारी टीआर यादव को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय का अतिरिक्त चार्ज सौंप दिया गया है। इस तरह अधिकारियों की कमी से विश्वविद्यालय का कार्य प्रभावित हो रहा है।