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अंक देने में किए जाने वाले खेल पर लगाम कसने को एलयू ने उठाया ये कदम

Thu, 09 Nov 2017 03:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 09 Nov 2017 03:02 PM IST
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semester exam copies will be submitted in lucknow university
डेमो - फोटो : demo pic

लखनऊ विश्वविद्यालय से सहयुक्त सभी कॉलेजों को आंतरिक मूल्यांकन की कॉपियां भी मुख्य परीक्षा की तरह एग्जाम के दिन विवि के संबंधित विभाग को भेजनी होंगी। अभी तक कॉलेज आंतरिक मूल्यांकन के नंबर ही यूनिवर्सिटी को भेजता था, जबकि उत्तर पुस्तिकाएं कॉलेज में ही रहती थीं। इससे आंतरिक मूल्यांकन के नंबरों में खेल की शिकायत आती थी।

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 मामले को देखते हुए विवि प्रशासन ने आंतरिक मूल्यांकन के नंबर पोर्टल के माध्यम से परीक्षा के दिन ही भेजने का निर्देश जारी किया है। ऑनलाइन नंबर भरने में गड़बड़ी न हो, इसके लिए उत्तर पुस्तिका भी परीक्षा के दिन ही विवि के पास भेजनी होंगी। विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी होगी कि वे उनमें से कुछ कॉपियों और उनमें दिए गए नंबरों का पोर्टल से मिलान कर लें।
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इस तरह से मूल्यांकन में होने वाली गड़बड़ी तुरंत सामने आ जाएगी। विवि प्रशासन ने इंटरनल परीक्षा के मूल्यांकन में पारदर्शिता बरतने को पोर्टल भी बनवाया है। इस पर कॉलेज और विभागाध्यक्षों को इंटरनल के नंबर परीक्षा के  दिन ही ऑनलाइन भरने होंगे। ऑनलाइन नंबर भरने में इसकी आशंका हो सकती है कि कॉलेज छात्र की उपस्थिति के बिना ही उसे नंबर दे दें या फिर जानबूझकर बहुत ज्यादा या बहुत कम नंबर दे दें।
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इस पर रोक लगाने को उनकी उत्तर पुस्तिका भी परीक्षा के दिन भेजने को कहा गया है। पोर्टल पर नंबर भरने की अनिवार्यता होने से समय की काफी बचत होगी। अभी तक कॉलेजों और विभाग से नंबर की शीट परीक्षा विभाग को भेजी जाती है। इसमें समय लग जाता है। कई बार इंटरनल के नंबर न होने से रिजल्ट भी लेट हो जाता है। नई व्यवस्था में इसमें लगने वाला समय बच जाएगा और समय से रिजल्ट निकलेगा। निर्धारित अवधि के बाद पोर्टल पर नंबर भरना संभव नहीं होगा। नंबर न भर पाने पर पूरी जिम्मेदारी कॉलेज की होगी।

सेमेस्टर में होती है आंतरिक मूल्यांकन व्यवस्था

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लखनऊ य‌ूनिवर्सिटी - फोटो : demo pic

यूजीसी और विश्वविद्यालय दोनों की मंशा है कि सालाना परीक्षा के बजाए पूरे साल मूल्यांकन चले। इस कारण सेमेस्टर प्रणाली में आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था है। यह लिखित परीक्षा, उपस्थिति और प्रोजेक्ट आदि पर होता है। आंतरिक मूल्यांकन सेमेस्टर के बीच में होता है और सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होता है।

मुख्य परीक्षा में इसके नंबर जोड़े जाते हैं। कई बार कॉलेज किसी छात्र या सभी छात्रों को फायदा देने को बहुत ज्यादा नंबर देते हैं। कई कॉलेज में तो आंतरिक मूल्यांकन किए बगैर ही नंबर दे दिए जाते हैं। उत्तर पुस्तिकाएं भी कॉलेज में ही रहती हैं। इस पर लगाम लगाने और आंतरिक मूल्यांकन में पारदर्शिता लाने को ये कदम उठाए जा रहे हैं।

आंतरिक मूल्यांकन के नंबर विभाग और कॉलेजों को ऑनलाइन भरने होंगे। ऐसे में शीट से नंबर नकल करने में होेने वाली गलती की आशंका कम रहेगी। पोर्टल पर नंबर भरने के बाद वहीं से डाटा परीक्षाफल बनाने को उठाया जाएगा। इससे समय भी बचेगा। नई व्यवस्था में इंटरनल के नंबर के नाम पर छात्र के शोषण पर भी रोक लगेगी। कॉलेज प्रशासन छात्र को इंटरनल में फेल करने या कम नंबर देने की धमकी नहीं दे सकेंगे। उत्तर पुस्तिका से मिलान करते ही पोर्टल पर दिए नंबर की हकीकत सामने आ जाएगी। ऐेसे में कॉलेज प्रशासन खेल नहीं कर सकेंगे।

इंटरनल के नंबर ऑनलाइन मंगाने के साथ उत्तर पुस्तिका से उसका मिलान भी जरूरी है। इस कारण आंतरिक मूल्यांकन की उत्तर पुस्तिकाएं संबंधित विभागों में जमा करनी होगी। इससे आंतरिक मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी। - प्रो. एके शर्मा परीक्षा नियंत्रक, लविवि 

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