एलयू: पीएचडी आर्डनेंस पर दो और विभागों ने उठाए सवाल
लविवि में पीएचडी की सीटों को लेकर चल रहा विवाद सुलझने की जगह उलझता जा रहा है। एक तरफ विवि ने प्रवेश परीक्षा की तिथियां घोषित कर दी हैं जबकि दूसरी ओर अभी सीटें तय नहीं हो पा रही हैं।
पहले तो केवल सोशियोलॉजी और स्टैटिस्टिक्स विभाग की ओर से संबद्ध कॉलेजों मे पीएचडी सीटों के आवंटन का विवाद चल रहा था लेकिन अब कॉमर्स और एप्लाइड इकोनॉमिक्स विभाग ने भी सीट आवंटन पर हाथ खड़े कर दिए हैं।
दोनों ही विभागों ने प्रवेश समन्वयक को पत्र लिखकर सीटों का निर्धारण खुद ही करने को कहा है। इनका तर्क है कि विवि के पीएचडी ऑर्डिनेन्स में कॉलेजों के शिक्षकों को सीट आवंटित करने से संबंधित मानक स्पष्ट नहीं।
विवि ने पहली बार कॉलेज शिक्षकों को भी पीएचडी कराने की अनुमति दी है। आवेदन शुरू होने से पहले ही प्रवेश समन्वयक ने सीटों का ब्यौरा मांगा गया था।
सीटों की संख्या को लेकर स्पष्ट नहीं
इस पर सोशियोलॉजी और स्टैटिस्टिक्स विभागाध्यक्ष ने बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक के निर्णय का हवाला देते हुए स्ववित्तपोषित पीजी कोर्स के शिक्षकों को पीएचडी सीट न देने की बात कही, भले ही वह अनुदानित कॉलेजों में हों। इनका तर्क है कि पीएचडी ऑर्डिनेन्स में इसे लेकर स्पष्ट नहीं है।
कॉलेज का शिक्षक भले ही रेग्युलर हो लेकिन यदि कोर्स स्ववित्तपोषित है तो उसके आधार पर पीएचडी की अनुमति नहीं दी जा सकती। कुछ समय पहले समस्या को सुलझाने के लिए डीन आर्ट्स प्रो. बीके तिवारी की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय कमेटी ने कहा कि यदि अनुदानित कॉलेज में चलने वाले स्ववित्तपोषित पीजी कोर्स में पढ़ाने वाला शिक्षक रेग्युलर है तो वह पीएचडी करा सकता है।
सभी विभागाध्यक्षों से कहा गया कि वह कॉलेजों से सीटों का ब्यौरा लेकर 10 नवंबर तक प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा को उपलब्ध कराएं।