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एलयू में तैयार हो रहा समाज कार्य का मॉडल पाठ्यक्रम, पूरे देश में होगा लागू, ये होंगी खासियतें

Sat, 29 Dec 2018 03:48 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 29 Dec 2018 03:48 PM IST
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Model course of social work will be executed in lucknow university
lucknow university - फोटो : amar ujala
लखनऊ विश्वविद्यालय समाज कार्य विषय का मॉडल पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है, जो संभवत: नए सत्र से ही पूरे देश में लागू किया जा सकता है। खास ये कि इस मॉडल पाठ्यक्रम में क्लास रूम की पढ़ाई के अलावा प्रैक्टिकल व सामाजिक कार्यों को भी जोड़ा जा रहा है, जिसके नंबर मिलेंगे।
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इतना ही नहीं प्रत्येक पेपर में यह भी बताया जाएगा कि इसे पढ़ाने का उद्देश्य क्या है और कोर्स पूरा होने पर विद्यार्थी का इसी उद्देश्य के आधार पर मूल्यांकन भी होगा। यूजीसी लर्निंग आउटकम बेस्ड कॅरिकुलम फ्रेमवर्क के तहत देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से 37 विषयों का मॉडल पाठ्यक्रम तैयार करवा रहा है।
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हर विषय के विशेषज्ञों की अध्यक्षता में गठित कमेटियों की देखरेख में यह पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय को समाज कार्य विषय का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है, जिसके अध्यक्ष विभाग के वरिष्ठ शिक्षक व प्रति कुलपति प्रो. राजकुमार सिंह हैं।
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उन्होंने बताया कि मॉडल पाठ्यक्रम में प्रैक्टिकल, कमेटी कार्यों व सामाजिक कार्यों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। इसके नंबर भी निर्धारित होंगे। अभी तक 100 नंबर का थ्योरी का पेपर होता था। अब 80 नंबर थ्योरी व 20 नंबर प्रैक्टिकल पर होंगे।

लेक्चर पर आधारित नहीं होगी पढ़ाई

Model course of social work will be executed in lucknow university
हर पेपर का एक उद्देश्य तय होगा कि इसमें विद्यार्थी से क्या उम्मीद है। बाद में इसी आधार पर विद्यार्थी का मूल्यांकन भी किया जाएगा। पढ़ाई सिर्फ लेक्चर पर आधारित नहीं होगी बल्कि इसे संवाद स्थापित (कम्युनिकेटिंग) करने वाला बनाया जाएगा।

प्रो. सिंह ने कहा कि इसमें सेमेस्टर के साथ चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) व्यवस्था भी प्रभावी होगी। यह सारी कवायद आउटकम बेस्ड एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है। मॉडल पाठ्यक्रम का काम आखिरी चरण में चल रहा है।

हम जल्द ही इसे बनाकर यूजीसी को दे देंगे। अन्य विषयों के भी पाठ्यक्रम आ जाने के बाद यूजीसी इसे नए सत्र से प्रभावी कर सकती है। इस पर अंतिम निर्णय यूजीसी के स्तर से ही लिया जाएगा।
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