नई शिक्षा नीति लागू करने में मददगार बनेगा लखनऊ विश्वविद्यालय
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लखनऊ विश्वविद्यालय परास्नातक स्तर पर मल्टी एग्जिट की सुविधा देने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। इसके बाद विश्वविद्यालय एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। लविवि मध्यप्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में सहयोग करेगा। इसके लिए मध्य प्रदेश की टीम ने पिछले सप्ताह विवि का दौरा किया। इस दौरान टीम ने कुलपति तथा नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए बनी समिति की सदस्य व लविवि की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. पूनम टंडन से मुलाकात की।
देश में 36 साल के लंबे अंतराल के बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की जा रही है। इसके प्रावधान पूरी तरह लागू करने के लिए पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की जरूरत है। लविवि ने इसे समझते हुए वर्तमान सत्र से ही इसे परास्नातक स्तर पर लागू कर दिया है।
नई शिक्षा नीति में अन्य बिंदुओं के साथ एक बड़ा बिंदु मल्टी एग्जिट की सुविधा देना है। इसके अनुसार विद्यार्थी को किसी भी स्तर पर परीक्षा पास करके पाठ्यक्रम छोड़ने का विकल्प दिया जाता है। विद्यार्थी को उसके द्वारा पढ़े गए सिलेबस के आधार पर डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा और डिग्री देने की व्यवस्था है।
लविवि ने स्नातक स्तर पर इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, जबकि परास्नातक स्तर पर इसे लागू कर दिया है। इसके साथ ही चॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के माध्मय से अन्य संकाय के विषय पढ़ने की आजादी, वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई के साथ ही मूल्य आधारित शिक्षा को भी सिलेबस का हिस्सा बनाया गया है। ऐसा करने वाला लविवि देश का पहला विश्वविद्यालय है। इसीलिए मध्य प्रदेश की टीम ने लविवि का दौरा करके मार्गदर्शन लिया है। इस टीम में अजय प्रकाश खरे, संजय जैन तथा दिवा मिश्रा शामिल थे।
स्नातक स्तर के लिए तैयार हो रहा सिलेबस
लखनऊ विश्वविद्यालय ने दाखिले में देरी होने की वजह से परास्नातक स्तर पर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को शामिल कर लिया है। इस समय स्नातक स्तर पर इसे लागू करने की तैयारी चल रही है। स्नातक में विद्यार्थियों की संख्या परास्नातक की तुलना में बेहद ज्यादा है।
अगले सत्र से चार अन्य जनपदों के कॉलेज भी लखनऊ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से पढ़ाई करेंगे। ऐसे में स्नातक स्तर पर विद्यार्थियों की कुल संख्या करीब ढाई लाख हो सकती है। स्नातक स्तर पर जो भी बदलाव होंगे वे सभी विद्यार्थियों पर लागू होंगे। इसलिए लविवि इस पर भी ध्यान दे रहा है कि प्रावधान नई शिक्षा नीति के हिसाब से होने के साथ ही व्यवहारिक भी होने चाहिए, ताकि उन्हें आसानी से लागू किया जा सके।
लखनऊ विश्वविद्यालय करेगा दूसरे संस्थानों की मदद
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अलोक कुमार का कहना है कि पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश की टीम ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर मुलाकात की और यहां लागू प्रावधानों पर चचा की। लविवि परास्नातक स्तर पर मल्टी एग्जिट की सुविधा देने वाला देश का पहला विवि बन गया है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम अन्य संस्थानों को नई शिक्षा नीति लागू करने में मदद करें।