एलयू के अनुदान में 10 करोड़ का इजाफा, छात्रावासों की मरम्मत व विद्यार्थी सुविधाओं में होगा सुधार
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खराब आर्थिक स्थिति से जूझ रहे लखनऊ विश्वविद्यालय को थोड़ी राहत मिली है। शासन ने लविवि के फ्रीज अनुदान में 10 करोड़ रुपये का इजाफा कर दिया है। शासन ने लविवि को मिलने वाला वार्षिक अनुदान 20 साल पहले फ्रीज कर दिया था। इसके बाद अब विश्वविद्यालय को 34 करोड़ के बजाय 44 करोड़ रुपये अनुदान मिलेगा।
लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह के अनुसार अनुदान की गणना अब हर साल बजट के हिसाब से होगी। ऐसे में यह अनुदान अब हर साल बढ़ेगा। उन्होंने बढ़ी हुई राशि का उपयोग छात्रावासों की मरम्मत और विद्यार्थी सुविधाओं के लिए करने की बात कही है। शासन ने करीब 20 साल पहले वित्तीय दुरुपयोग की बात कहते हुए विवि का अनुदान फ्रीज कर दिया था।
इसके बाद दो वेतनमान दिए जा चुके हैं, लेकिन विवि को एक निश्चित रकम ही शासन से मिलती है। बाकी रकम का भुगतान विवि को अपने स्तर से करना होता है। विद्यार्थियों की फीस बढ़ोत्तरी के पीछे भी सबसे बड़ी वजह यही है। सातवां वेतन आयोग लागू करने के बाद लविवि के वेतन मद का खर्च ही 160 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। ऐसे में कुलपति ने अनुदान राशि बढ़ोत्तरी के लिए मुख्यमंत्री से मांग की थी। इसके बाद ही सीएम ने इसे मंजूरी दी है।
इसी सत्र में बढ़ाई गई है फीस
लविवि ने अपने आर्थिक हालत का हवाला देते हुए इसी सत्र में फीस में बढ़ोत्तरी की है। कई कोर्स के मामले में यह बढ़ोत्तरी 40 फीसदी तक है। यही वजह है कि विवि के छात्रावासों में चलने वाली मेस में प्रतिदिन 100 रुपये से ज्यादा खाने की फीस ली जाती है। विवि खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा परीक्षा फीस भी वसूलता है।
बढ़ने के बाद अनुदान में हो गई थी कटौती
समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान लविवि की ग्रांट 34 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 44 करोड़ की गई थी। बढ़ी हुई ग्रांट का सिर्फ एक ही बार भुगतान हो सका। इसके बाद वर्तमान सरकार ने इसे वापस 34 करोड़ रुपये कर दिया तथा एक साल में बढ़े हुए 10 करोड़ रुपये काटकर पिछले साल का अनुदान भुगतान किया था। इस तरह से विवि को पिछले साल सिर्फ 24 करोड़ रुपये ही शासन से मिले थे।
उम्मीद है हर साल होगा इजाफा
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने विवि के फ्रीज अनुदान में 10 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। उम्मीद है कि बजट की तरह हर साल यह राशि 10 से 15 फीसदी तक बढ़ेगी। इस राशि का उपयोग छात्रावासों की मरम्मत में किया जाएगा। परिसर में विद्यार्थी सुविधा में इजाफा करने में भी अब आसानी होगी।