लखनऊ विश्वविद्यालय: छात्रों को अभी करना होगा फ्री वाई-फाई के लिए और इंतजार
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लखनऊ विश्वविद्यालय को वाई-फाई करने का सपना फिर से अधर में लटक गया है। विवि ने रिलायंस जियो के साथ फरवरी में एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। कंपनी ने परिसर में टॉवर भी लगा दिया।
मगर अब विवि प्रशासन को समझ आ रहा है कि प्रति उपयोगकर्ता महीने में सिर्फ डेढ़ जीबी डाटा बहुत कम है। इसलिए अब वाई-फाई सुविधा शुरू करने के लिए विवि नए रास्ते तलाश रहा है।
विवि प्रशासन ने शासन के निर्देश पर 20 फरवरी को रिलायंस जियो के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। इस करार के तहत रिलायंस जियो को दोनों कैंपस में वाई-फाई सुविधा देनी थी। इसके लिए विवि सिर्फ जमीन देगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रख-रखाव का खर्च जियो ही वहन करेगा। सुविधा शुरू होने के बाद विवि के शिक्षक, विद्यार्थी और कर्मचारी प्रतिदिन 1.5 जीबी डाटा प्रति माह उपयोग कर सकेंगे।
कंपनी ने काम शुरू करके अपना टावर भी लगा दिया। विवि प्रशासन का कहना है कि आज के समय में जब अनलिमिटेड डाटा की बात चल रही है। ऐसे में प्रति महीने महज 1.5 जीबी डाटा की सीमा बेहद कम है। इसलिए इसे शुरू करने से पहले विचार-विमर्श किया जा रहा है।
कई साल से हो रहा है वाई-फाई करने का दावा
लविवि प्रशासन पिछले कई साल से कैंपस को वाई-फाई से लैस करने का दावा कर रहा है। पूर्व कुलपति प्रो. एसबी निमसे के कार्यकाल में कैंपस को वाई-फाई करने को अपनी प्राथमिकता बताया था।
उच्चतर शिक्षा अभियान से विवि को इसके लिए अनुदान भी मिला, लेकिन पर्याप्त रकम न होने की वजह से यह पूरा नहीं हो सका। इसके बाद राज्य सरकार ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों को वाई-फाई योजना के तहत 55 करोड़ रुपये जारी किए। इससे भी काम न चलने पर राज्य सरकार के निर्देश पर इन्वेस्टर्स समिट से पहले रिलायंस जियो के साथ लविवि ने करार किया।
बातचीत चल रही है
प्रो. राजकुमार सिंह,
कुलसचिव, लविवि