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एलयू ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव के दो मॉडल राजभवन भेजे

Sat, 19 Nov 2016 02:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 19 Nov 2016 02:58 PM IST
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 Lucknow university exam plan send to rajbhawan.
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एलयू ने परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार लाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की योजना तैयार कर ली है। इसके अंतर्गत विवि ने परीक्षा कराने के लिए तैयार दो मॉडलों को राजभवन भेजा है।

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कुलपति प्रो. एसबी निमसे के सुझाव से तैयार एक मॉडल के अंतर्गत स्नातक प्रथम व द्वितीय वर्ष में छात्रों को ओएमआर शीट पर मल्टीपल चॉइस वाले प्रश्नों के  उत्तर देने होंगे। जबकि तीसरे साल में डिस्क्रिप्टिव उत्तर वाली लिखित परीक्षा होगी। इस मॉडल से छात्रों के ज्ञान का पूरा असेसमेंट हो सकेगा।
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वहीं दूसरे मॉडल में 50 फीसदी प्रश्न मल्टीपल चॉइस वाले, 30 फीसदी प्रश्न शॉर्ट आंसर वाले डिस्क्रिप्टिव और 20 फीसदी अंक कंटीन्यूअस इंटर्नल इवेल्यूएशन (सीआईई) के होंगे। इसमें सीआईई के 20 फीसदी अंक कॉलेज व विभागों के पास रहेंगे।
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वह इसमें डिस्क्रिप्टिव प्रश्न से परीक्षा कराएंगे, जबकि बाकी अंकों के लिए परीक्षा होगी। दूसरा मॉडल उस रिपोर्ट पर आधारित है जिसके आधार पर राजभवन सभी विवि में नई व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहा है।

परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके शर्मा ने बताया कि लविवि के प्रस्ताव में खास बात यह भी है कि मल्टीपल आंसर वाले प्रश्नों में जरूरी नहीं कि चार ही विकल्प दिए जाएं। वह अधिक भी हो सकते हैं। दूसरा कि एक प्रश्न के एक से अधिक उत्तर भी होंगे। इसके लिए ऐसा क्वेशचन बैंक बनाया जाएगा, जिससे प्रश्नपत्र तैयार करते समय सभी टॉपिक कवर हो जाएं।

मूल्यांकन के साथ कॉपियों की स्क्रूटनी

 Lucknow university exam plan send to rajbhawan.

विवि ने यह प्रस्ताव रखा है कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के साथ ही उनकी स्क्रूटनी भी होती रहे। इसमें प्रत्येक 25 उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल में तीन से पांच कॉपियां एक स्क्रूटनी बोर्ड जांचेगा। वह देखेगा कि कॉपियों में कोई उत्तर जंचने से न छूटा हो या कहीं गलत अंक न चढ़ें।

इस बोर्ड में संबंधित विषय के शिक्षक नहीं होंगे। यदि किसी बंडल में अधिक गड़बड़ी मिली तो उसे जांचने वाले शिक्षक की सभी कॉपियों की स्क्रूटनी करवाई जाएगी। इतना ही कॉपियां संबंधित विषय के शिक्षकों से भी जंचवाए जाने का प्रस्ताव है।

यदि दूसरे एग्जामिनर से कॉपी जांचने पर 15 फीसदी से अधिक अंकों का वेरिएशन आएगा तो पहले और दूसरे एग्जामिनर ने जितने अंक दिए उसका एवरेज दिया जाएगा।

इस स्थिति में दूसरा एग्जामिनर पहले वाले को अंक बढ़ने के कारण भी बताएगा। प्रो. शर्मा ने बताया कि हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय सहित कुछ अन्य जगह स्क्रूटनी बोर्ड की व्यवस्था लागू है।

सेल्फ सेंटर की व्यवस्था होगी खत्म

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परीक्षा नियंत्रक प्रो. शर्मा ने बताया कि इसी सत्र से सेल्फ सेंटर की व्यवस्था खत्म करने का भी प्रस्ताव है। कॉलेज चाहे अनुदानित हों या स्ववित्तपोषित, सभी का परीक्षा केंद्र दूसरी जगह भेजा जाएगा।

ऑब्जेक्टिव वाले जो प्रश्नपत्र दिए जाएंगे उसमें भी सीमित समय मिलेगा। जैसे 100 प्रश्नों के लिए 100 मिनट का समय होगा। इससे छात्र नकल नहीं कर पाएंगे।

मैथ्स या स्टैटिस्टिक्स जैसे प्रैक्टिकल विषय की कॉपियों का मूल्यांकन करते समय शिक्षकों को उसका सॉल्यूशन भी उपलब्ध कराया जाए। नई व्यवस्था लागू होने पर प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए वर्कशॉप कराई जाएगी।

शिक्षक कॉपियां जांचते समय लापरवाही न करें इसके लिए टाइम कीपिंग रिकॉर्ड की व्यवस्था होगी। इसमें कॉपियां लेने और जमा करने के समय शिक्षक को मैनुअल या बायोमीट्रिक मशीन से एंट्री करनी होगी। इससे पता चलेगा कि किसने कितनी कॉपियां जांचने में कितना समय लगाया।

ऑनलाइन मूल्यांकन की भी योजना

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सूत्रों की मानें तो विवि ने ऑनलाइन मूल्यांकन का प्रस्ताव तैयार किया है। गत सत्र से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन मूल्यांकन लागू किया है।

इसमें शिक्षकों को उनकी लॉगइन पर उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन करके जांचने के लिए भेजी जाती हैं। एकेटीयू में यह प्रयास काफी सफल रहा। हालांकि एलयू इसे किस रूप में लागू कर सकता है इस पर अभी मंथन बाकी है।

कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने बताया कि इन्फॉर्मेशन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढ़ाने से कम समय नकल विहीन परीक्षा होगी।

राजभवन को यह सुझाव इस उद्देश्य से भेजे गए हैं कि सभी विवि में इन्हें लागू किया जा सकता है। हालांकि हम अपने यहां परीक्षा समिति के माध्यम से लागू करेंगे।

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