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यूपी बोर्ड: दागी सेंटर फिर बने परीक्षा केंद्र, विभाग लाचार
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 12 Dec 2017 03:21 PM IST
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केस 1- मलिहाबाद स्थित कुंवर आसिफ अली इंटर कॉलेज में 2017 की बोर्ड परीक्षा के पहले दिन ही गड़बड़ी मिली थी। विद्यालय प्रशासन ने सीटिंग प्लान में खेल कर अपने यहां की छात्राओं को अलग बैठा दिया और विषय विशेषज्ञ की ही ड्यूटी लगा दी। पूर्व डीआईओएस ने कॉलेज को काली सूची में डालने की संस्तुति की थी। इस साल यह कॉलेज फिर परीक्षा केंद्र बना है।
केेस 2- माल स्थिात एस पब्लिक इंटर कॉलेज मेें बोर्ड परीक्षा-2017 में 18 मार्च को हुई यूपी बोर्ड परीक्षा की दूसरी पाली में हिंदी की परीक्षा में नौ में से सात कमरों में हिन्दी विषय के ही शिक्षक ड्यूटी करते मिले थे। डीआईओएस ने इस कॉलेज को भी डिबार करने की संस्तुति की थी। इसके बावजूद इस बार भी यह कॉलेज परीक्षा केंद्र की सूची में शामिल है।
केस 3- माल स्थित महेश सिंह सरस्वती इंटर कॉलेज में विभागीय अधिकारियों ने दो बार औचक निरीक्षण किया तो वहां छात्रों के फर्जी पंजीकरण का खुलासा हुआ था। कक्षा 10 और 12 में पंजीकरण के मुकाबले छात्रों की संख्या काफी कम थी। डीआईओएस ने छात्र संख्या असत्य और संदिग्ध मानते हुए नामावली जमा करने पर रोक लगाई थी। इसकेे बावजूद यह कॉलेज भी सूची में शामिल है।
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केस 4 - माल स्थित एसपी सिंह इंटर कॉलेज सैदापुर का भी डीआईओएस की टीम ने दो बाद औचक निरीक्षण किया था। उस वक्त 9वीं में पंजीकृत 160 के मुकाबले 91 और 11वीं में 163 के मुकाबले सिर्फ 59 विद्यार्थी ही मौके पर मिले थे। छात्र संख्या संदिग्ध होने की वजह से डीआईओएस ने नामावली जमा करने पर रोक लगा दी थी। यह कॉलेज भी परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
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केेस 2- माल स्थिात एस पब्लिक इंटर कॉलेज मेें बोर्ड परीक्षा-2017 में 18 मार्च को हुई यूपी बोर्ड परीक्षा की दूसरी पाली में हिंदी की परीक्षा में नौ में से सात कमरों में हिन्दी विषय के ही शिक्षक ड्यूटी करते मिले थे। डीआईओएस ने इस कॉलेज को भी डिबार करने की संस्तुति की थी। इसके बावजूद इस बार भी यह कॉलेज परीक्षा केंद्र की सूची में शामिल है।
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केस 3- माल स्थित महेश सिंह सरस्वती इंटर कॉलेज में विभागीय अधिकारियों ने दो बार औचक निरीक्षण किया तो वहां छात्रों के फर्जी पंजीकरण का खुलासा हुआ था। कक्षा 10 और 12 में पंजीकरण के मुकाबले छात्रों की संख्या काफी कम थी। डीआईओएस ने छात्र संख्या असत्य और संदिग्ध मानते हुए नामावली जमा करने पर रोक लगाई थी। इसकेे बावजूद यह कॉलेज भी सूची में शामिल है।
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केस 4 - माल स्थित एसपी सिंह इंटर कॉलेज सैदापुर का भी डीआईओएस की टीम ने दो बाद औचक निरीक्षण किया था। उस वक्त 9वीं में पंजीकृत 160 के मुकाबले 91 और 11वीं में 163 के मुकाबले सिर्फ 59 विद्यार्थी ही मौके पर मिले थे। छात्र संख्या संदिग्ध होने की वजह से डीआईओएस ने नामावली जमा करने पर रोक लगा दी थी। यह कॉलेज भी परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
136 परीक्षा केंद्रों पर लगी मुहर
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ये तो चंद उदाहरण हैं, विभाग के तमाम दावों और ऑनलाइन परीक्षा केंद्र निर्धारण के बावजूद कई दागी सेंटर फिर से यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बना दिए गए हैं। विभागीय अधिकारी इसे मजबूरी में लिया गया फैसला बता रहे हैं। मगर इस निर्णय से परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
यूपी बोर्ड की ओर से रविवार देर रात परीक्षा केंद्रों की फाइनल सूची जारी कर दी गई। सूची में जिला समिति द्वारा प्रस्तावित सभी 136 परीक्षा केंद्रों पर मुहर लगाई गई है। दागी और फर्जी पंजीकरण के आरोपी कॉलेजों में भी परीक्षा आयोजित की जाएगी।
इस साल पहली बार हाईस्कूल-इंटर यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्रों की सूची ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से निर्धारित की गई थी। इसके माध्यम से 154 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इनमें कई राजकीय और अनुदानित विद्यालयों को दरकिनार कर निजी वित्तविहीन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया था
यूपी बोर्ड की ओर से रविवार देर रात परीक्षा केंद्रों की फाइनल सूची जारी कर दी गई। सूची में जिला समिति द्वारा प्रस्तावित सभी 136 परीक्षा केंद्रों पर मुहर लगाई गई है। दागी और फर्जी पंजीकरण के आरोपी कॉलेजों में भी परीक्षा आयोजित की जाएगी।
इस साल पहली बार हाईस्कूल-इंटर यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्रों की सूची ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से निर्धारित की गई थी। इसके माध्यम से 154 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इनमें कई राजकीय और अनुदानित विद्यालयों को दरकिनार कर निजी वित्तविहीन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया था
देखें, आंकड़ें
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इस सूची में कई खामियों की वजह से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दोबारा परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया गया। नई सूची में दावा किया गया कि 34 कॉलजों को परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर कर दिया गया और 18 राजकीय और अनुदानित विद्यालयों को सूची में शामिल किया गया। इसके बावजूद दागी और फर्जी पंजीकरण के आरोपी कॉलेेज सूची में जगह पा गए। राजधानी में इस साल एक लाख परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।
माल और मलिहाबाद क्षेत्र में राजकीय और अनुदानित कॉलेज काफी कम हैं। इसलिए मजबूरी में ही इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। हमारे पास विकल्प नहीं थे। इन कॉलेजों का परीक्षा केंद्र बनने का मतलब यह नहीं है कि यहां किसी प्रकार की गड़बड़ी हो सकेगी। इनपर पूरी निगाह होगी। जरूरत पड़ी तो केंद्र व्यवस्थापक विभाग की तरफ से तैनात होगा। - डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस, लखनऊ
2018 में परीक्षा के लिए पंजीकृत विद्यार्थी
हाईस्कूल संस्थागत- 56,759
व्यक्तिगत- 1,171
कुल- 57,930
इंटर संस्थागत- 45,651
व्यक्तिगत- 2017
कुल- 47,668
राजधानी में कुल परीक्षार्थी - 1,05,598
माल और मलिहाबाद क्षेत्र में राजकीय और अनुदानित कॉलेज काफी कम हैं। इसलिए मजबूरी में ही इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। हमारे पास विकल्प नहीं थे। इन कॉलेजों का परीक्षा केंद्र बनने का मतलब यह नहीं है कि यहां किसी प्रकार की गड़बड़ी हो सकेगी। इनपर पूरी निगाह होगी। जरूरत पड़ी तो केंद्र व्यवस्थापक विभाग की तरफ से तैनात होगा। - डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस, लखनऊ
2018 में परीक्षा के लिए पंजीकृत विद्यार्थी
हाईस्कूल संस्थागत- 56,759
व्यक्तिगत- 1,171
कुल- 57,930
इंटर संस्थागत- 45,651
व्यक्तिगत- 2017
कुल- 47,668
राजधानी में कुल परीक्षार्थी - 1,05,598