इंजीनियर बनाने के साथ अंग्रेजी भी सुधारेगा एलयू
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लखनऊ विवि के प्रस्तावित इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स को अपनी इंग्लिश दुरुस्त करने का मौका भी मिलेगा। विवि इसके लिए करीब 40 लाख रुपये की लागत से लैंग्वेज लैब की स्थापना करेगा।
इस लैंग्वेज लैब में स्टूडेंट्स को सही तरीके से अंग्रेजी लिखना, बोलना और पढ़ना सिखाया जाएगा। इंजीनियरिंग फैकल्टी में लैंग्वेज लैब के साथ ही सात अन्य प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी।
इन सभी प्रयोगशालाओं का प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसकी स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फर्स्ट इयर के स्टूडेंट्स के लिए इन सभी प्रयोगशालाओं में प्रैक्टिकल करना अनिवार्य होगा।
विवि में शैक्षिक सत्र 2017-18 से इंजीनियरिंग की पांच ब्रांच की पढ़ाई शुरू होनी है। इनमें कंप्यूटर साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में 60-60 सीटों पर दाखिले प्रस्तावित हैं।
दाखिले राज्य प्रवेश परीक्षा की काउंसलिंग के माध्यम से लिए जाने हैं। इस संबंध में एकेटीयू को पत्र भी भेजा चुका है। लखनऊ के शैक्षिक संस्थानों में भाग लेने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स लखनऊ या फिर आसपास के जिलों से होते हैं।
सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर से लैस होगी लैंग्वेज लैब
इंग्लिश में कमजोर होने पर स्टूडेंट्स को नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए फर्स्ट इयर में स्टूडेंट्स को इंग्लिश की पढ़ाई कराई जाती है। विवि ने इसको ध्यान में रखते हुए लैंग्वेज लैब की स्थापना करने का फैसला किया है।
लैंग्वेज लैब के साथ ही फिजिक्स, केमिस्ट्री, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, वर्कशॉप, मैकेनिकल, कंप्यूटर और ड्राइंग लैब की स्थापना भी की जाएगी। लैंग्वेज लैब को कंप्यूटर, कंसोल सिस्टम और सॉफ्टवेयर से लैस किया जाएगा।
इनसे जुड़कर स्टूडेंट्स को शिक्षक शब्द का सही उच्चारण और उपयोग सिखाएंगे। लैब में ऑडियो और विजुअल रिकॉर्डिंग भी मौजूद होंगी। इनसे जुड़कर स्टूडेंट्स शब्दों के उच्चारण का सही तरीका सीख सकेंगे।
आठों लैब की स्थापना में कुल मिलाकर एक से डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च प्रस्तावित है। इनमेें से अकेले लैंग्वेज लैब पर ही 40 से 45 लाख रुपये का खर्च प्रस्तावित है।
शुरू हो सकती है शिक्षकों की नियुक्ति
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बनी समिति ने प्रस्तावित भवन में एआईसीटीई के मानक के हिसाब से कम स्थान होने की बात कही थी। भवन के कमरे क्लास के लिए निर्धारित क्षेत्रफल से कम के हैं।
इसको देखते हुए भवन के आंतरिक नक्शे में कुछ बदलाव किया जा रहा है। इसका काम अंतिम चरण में है। नियमों के अनुसार डिग्री देने से पहले भवन संबंधी मानक पर किसी भी समय एआईसीटीई का अप्रूवल हो जाना चाहिए।
इसलिए विवि दाखिले के साथ ही अन्य मानक पूरा कर लेगा। मानक पूरे होने के बाद एआईसीटीई का अप्रूवल लिया जाएगा। विवि में इंजीनियरिंग के लिए डायरेक्टर और 19 शिक्षकों की नियुक्ति होनी है।
इससे पहले भवन के मानक और अन्य प्रक्रिया केे लिए विशेषज्ञ के रूप में प्रो. आरएस गुप्ता को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है। प्रो. गुप्ता सुलतानपुर स्थित कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शिक्षक रह चुके हैं।
48 क्रेडिट का होगा इंजीनियरिंग का एक सेमेस्टर
उनके साथ ही विवि के पूर्व कार्यकारी कुलसचिव रामकुमार को ओएसडी के रूप में नियुक्त की जा चुकी है। अगले सप्ताह से बाकी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रियी भी शुरू होनी है। इसके लिए कानपुर स्थित एचबीटीआई के विशेषज्ञों का सहारा लिया जा रहा है।
लखनऊ विश्वविद्यालय में नए सत्र से शुरू होने जा रहे इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में क्रेडिट पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली अपनाई जाएगी। आठ सेमेस्टर वाले इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में हर सेमेस्टर 48-48 क्रेडिट का होगा।
ये क्रेडिट थ्योरी और प्रैक्टिकल के आधार पर तय किए जाएंगे। स्टूडेंट को पास होने के लिए कम से कम 24 क्रेडिट लाना जरूरी होगा। लविवि में सोमवार को प्रति कुलपति प्रो. यूएन द्विवेदी की अध्यक्षता में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के सिलेबस, कोर्स स्ट्रक्चर और लाइब्रेरी आदि की स्थिति पर मुहर लगाई जा चुकी है।