दीक्षांत समारोह में शामिल हुए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, दिव्यांगों की प्रतिभा देख हुए अभिभूत
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पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में कुछ और सुविधाएं दिए जाने की आवश्यकता है। ताकि, यहां पठन-पाठन और भी सुचारू ढंग से हो सके। त्रिपाठी ने कहा, यह बड़ी खुशी की बात है कि यहां के विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि त्रिपाठी ने कहा कि यहां पढ़ रहे विद्यार्थियों में गजब का आत्मविश्वास दिखता है। अमूमन दिव्यांगजन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण निराश हो जाते हैं। पर, यहां मिले पंखों से वे ऊंची उड़ान के लिए तैयार हो रहे हैं। सामान्य और दिव्यांगजन की समावेशी शिक्षा सराहनीय है।
केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि दिव्यांगजनों की उपेक्षा करने वाले समाज को सभ्य नहीं कहा जा सकता। उचित माहौल मिलने पर दिव्यांगजनों ने बड़े काम किए हैं। संगीत के क्षेत्र में प्रवीण जैन ऐसा ही एक नाम है। त्रिपाठी ने उम्मीद जताई कि दीक्षांत समारोह में उपाधि पाने वाले दिव्यांगजन किसी पर बोझ बनने के बजाय स्वावलंबी बनेंगे। नई-नई विधाओं में संभावना तलाशेंगे।
दिव्यांग विद्यार्थियों के प्रति सदैव संवेदनशील रहें शिक्षक : राजभर
दिव्यांग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों को दिव्यांग विद्यार्थियों के प्रति सदैव अत्यधिक संवेदनशील रहना चाहिए। डॉ. शकुंतला मिश्रा विवि अपने आप में अनूठा है, क्योंकि यहां सामान्य और दिव्यांगजन विद्यार्थी एक साथ पढ़ते हैं। 50 प्रतिशत सीटें दिव्यांगजन के लिए आरक्षित हैं। दिव्यांगजन के लिए आरक्षित सीटों में से आधी सीटें दृष्टि बाधित विद्यार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं। यहां ब्रेल लिपि में भी पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध हैं। दिव्यांगजनों के लिए अलग से अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है। यहां का बाधा रहित परिसर खुद में एक उदाहरण है। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, दिव्यांग कल्याण महेश गुप्ता भी मौजूद रहे।
....जब सभागार में गूंजी हंसी