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लविविः पीएचडी सीटों की संख्या तय नहीं, अध्यादेश भी लटका

Wed, 01 Nov 2017 03:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 01 Nov 2017 03:19 PM IST
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issues of phd seats in lucknow university not solved
डेमो - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ विश्वविद्यालय के पीएचडी दाखिले साल के अंत तक होते नहीं दिख रहे हैं। नवंबर शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक विवि के पीएचडी अध्यादेश को मंजूरी नहीं मिली है। अंतिम तारीख बीतने के बावजूद पीएचडी की सीट संख्या भी तय नहीं हो सकी है। विवि में बीते साल पीएचडी के दाखिले दिसंबर महीने में हुए थे। इस बार दाखिलों में और देरी की आशंका बनी हुई है। 

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लविवि के पीएचडी अध्यादेश को अभी तक राजभवन की मंजूरी नहीं मिली है। विवि के पीएचडी अध्यादेश में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास करने वाले जेआरएफ को भी प्रवेश परीक्षा देने का प्रस्ताव था। नेट पास अभ्यर्थी को तो सामान्य पीजी स्टूडेंट की तरह ही माना गया है। इस पर राजभवन ने आपत्ति जताई थी। इस वजह से अभी तक राजभवन से अध्यादेश को मंजूरी नहीं मिली है।
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लखनऊ विवि के पिछले अध्यादेश में नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट दी गई थी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास करने के बावजूद नेट पास अभ्यर्थी को साक्षात्कार के समय सामान्य पीजी छात्र की तरह ही रखा गया था।
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विवि ने प्रवेश परीक्षा के नंबर को पूरी तरह से दरकिनार कर दाखिले की अंतिम मेरिट साक्षात्कार के आधार पर ही तैयार की थी। इसलिए बीते साल भी नेट-जेआरएफ अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा था। इस साल भी यह स्थिति न हो इसलिए नया अध्यादेश तैयार किया गया है, लेकिन अभी तक राजभवन की आपत्तियां दूर नहीं हुई हैं। इसलिए इसे मंजूरी भी नहीं मिल सकी है।

नहीं तय हुई सीट संख्या

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लविवि प्रशासन ने पीएचडी दाखिले के लिए सभी विभागों को 16 अक्तूबर तक उनके यहां की सीटों का ब्योरा देने को कहा था। बीते साल राजकीय और अनुदानित कॉलेज के पीजी शिक्षकों को पीएचडी का अधिकार मिला था। इस साल से शिक्षकों की मांग पर स्नातक के शिक्षकों को भी पीएचडी कराने का मौका दिया जा रहा है।

अध्यादेश के अनुसार शिक्षक को पीएचडी कराने का अधिकार तभी मिलेगा जबकि वो खुद पीएचडी कर चुके हों और पिछले पांच साल में उनके नाम कम से कम दो शोधपत्र प्रकाशित हों। विभागों को इसका सत्यापन करना होगा। हालत यह है कि विभागों ने अपनी सीट संख्या भेज दी है, लेकिन अभी तक विभागों ने कॉलेजों की सीट संख्या ही तय नहीं की है। इस वजह से अंतिम संख्या अभी तक तय नहीं है।

पीएचडी अध्यादेश राजभवन भेजा जा चुका है। वहां से मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू होगी। विभागों ने पीएचडी की खाली सीटों का ब्योरा भेज दिया है। कॉलेज के शिक्षकों की अर्हता डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी होने के बाद ही तय होगी। इसलिए इसमें थोड़ा समय लग रहा है। जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू  की जाएगी। - प्रो. अनिल मिश्रा, एडमिशन कोऑर्डिनेटर, लविवि
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