लविवि में इस बार भी अटकेंगे पीएचडी के दाखिले
लखनऊ विश्वविद्यालय के नए पाठ्यक्रमों और संकाय को एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद से मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से कुछ के आवेदन शुरू हो चुके हैं, जबकि कई पाठ्यक्रमों के दाखिले अगले साल से होंगे।
वहीं दूसरी ओर पीएचडी के दाखिलों का अभी तक कुछ अता-पता नहीं है। लविवि अभी तक पीएचडी का नया आर्डिनेंस तक तैयार नहीं कर सका है। इस वजह से अभी तक विवि प्रशासन ने विभागों से पीएचडी की सीटों का ब्योरा तक नहीं मांगा है।
विवि में बीते साल पीएचडी के दाखिले दिसंबर महीने में हुए थे। इस बार की तैयारियों को देखते हुए पीएचडी दाखिले एक बार फिर से बीते साल के ढर्रे पर जाते दिखाई दे रहे हैं।
तैयार किया जा रहा नया ऑर्डिनेंस
लखनऊ विवि के पिछले आर्डिनेंस में प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी अंक लाने की अनिवार्यता थी। नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट दी गई थी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास करने के बावजूद नेट पास अभ्यर्थी को साक्षात्कार के समय सामान्य पीजी छात्र की तरह ही रखा गया था।
विवि ने प्रवेश परीक्षा के नंबर को पूरी तरह से दरकिनार करके दाखिले की अंतिम मेरिट साक्षात्कार के आधार पर ही तैयार की थी। साक्षात्कार में जेआरएफ को मिलने वाले नंबर और एकेडमिक्स इंडेक्स को छोड़कर बाकी के 60 नंबर पूरी तरह से इंटरव्यूवर के हाथों में थे।
इसका नतीजा यह हुआ कि नेट और जेआरएफ के बजाय साधारण पीजी पास अभ्यर्थी दाखिला पाने में सफल रहे। विवि के दाखिलों पर इसको लेकर काफी आपत्ति भी जताई गई।
आपत्ति के बाद पीएचडी का नया ऑर्डिनेंस तैयार किया जा रहा है। अभी तक इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस वजह से पीएचडी आवेदन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।