निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस तय करेगी सरकार
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प्रदेश सरकार सूबे के निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की फीस तय करने जा रही है। जिन कॉलेजों ने अपनी आय-व्यय का ब्यौरा नहीं दिया है उनकी फीस सरकार खुद तय कर देगी। अभी तक 43 मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में मात्र 22 ने ही अपने ब्यौरे दिए हैं।
ऐसे में अब फीस कमेटी एक-दो दिनों में सभी कॉलेजों की फीस तय कर देगी। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अनिता भटनागर जैन के नेतृत्व में गठित फीस कमेटी अब तक फीस निर्धारण के लिए चार बैठकें भी कर चुकी है।
इस समिति ने सभी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों को एक विस्तृत प्रारूप में सूचना भेजने के निर्देश दिए थे। इस मामले में 23 मेडिकल कॉलेजों व 20 डेंटल कॉलेजों में से केवल 22 कॉलेजों ने ही अभी तक सूचना उपलब्ध कराई है।
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. वीएन त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने 18 फरवरी एवं एक मार्च, को समाचार पत्रों में विज्ञापन निकालकर सभी सूचनाएं हर हाल में तीन मार्च तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
इसके साथ ही 10 मार्च को एक अंतिम अवसर देते हुए मेडिकल कॉलेजों को अपना ब्यौरा फीस समिति को उपलब्ध कराने का मौका दिया। लेकिन कॉलेजों ने इतने मौके देने के बावजूद अभी तक ब्यौरा नहीं उपलब्ध कराया है।
पिछले साल अंतरिम फीस हुई थी तय
ऐसे में फीस कमेटी ने यह निर्णय लिया है कि जिनके ब्यौरे अभी तक नहीं आए हैं उनकी फीस कमेटी खुद तय कर देगी। इस मामले में सोमवार को भी फीस कमेटी की मीटिंग में कई कॉलेजों पर चर्चा हुई।
महानिदेशक ने बताया कि अगले दो-तीन दिनों में निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की फीस तय कर दी जाएगी। प्राइवेट मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की पिछले साल जो फीस तय हुई थी वह अंतरिम थी।
इसमें एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 11.30 लाख रुपये फीस तय हुई थी। जबकि डेंटल कॉलेजों में बीडीएस के लिए 3.25 लाख रुपये फीस तय हुई थी। अब फीस कमेटी को अलग-अलग कॉलेजों की सुनवाई कर अलग-अलग फीस तय करनी है।
दरअसल, अखिलेश यादव की सरकार ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की आधी सीटें 36 हजार रुपये सालाना में भरने का निर्णय लिया था। जबकि बची हुई आधी सीटों की फीस बढ़ाकर दोगुना कर दी थी।
लेकिन कॉलेज प्रबंधक सरकार के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए थे। वहां से उन्हें राहत भी मिल गई थी। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के अलग-अलग फीस के निर्णय को रद्द कर दिया था। अब सरकार नए सिरे से फीस तय कर रही है।