लखनऊ के एक स्कूल में सिखाई जाएगी फ्रेंच लैंग्वेज और कल्चर
- राजधानी में फ्रेंच सीखने वालों की संख्या लगभग 70 फीसदी बढ़ी
- अंतरराष्ट्रीय स्तर की फ्रेंच सीखेंगे राजधानी वासी
- लामार्टीनियर कॉलेज में खुलेगा आलियांज फ्रांसेज का केंद्र
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जल्द ही राजधानी में इंडो-फ्रेंच कल्चरल रिलेशनशिप को बढ़ावा मिलेगा। इतना ही नहीं राजधानीवासी फ्रेंच संस्कृति जैसे कला, गीत, संगीत, पहनावे आदि से भी रूबरू होंगे।
पेरिस की फाउंडेशन आलियांज फ्रांसेज ला-मार्टीनियर ब्वॉयज कॉलेज में जल्द ही अपना केंद्र खोलेगी। केंद्र भारत में 14वां जबकि यूपी का पहला होगा।
द्र में सात से 77 साल तक के लोगों को फ्रेंच भाषा लिखना, पढ़ना व बोलना सिखाया जाएगा। बुधवार को इसके प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर रिचर्ड फ्रैंको, डेलीगेट जर्नल रामो और दिल्ली की संस्था के अध्यक्ष जवाहर लाल सरीन ने संयुक्त प्रेस वार्ता में मीडिया को बताया कि इस अलायंज की स्थापना के लिए करीब एक साल पहले लखनऊ में मीटिंग की गई थी।
अब यह प्रोजेक्ट शुरू होने को है। जल्द ही यहां सात सदस्यों का चयन कर लोकल एसोसिएशन का पंजीकरण कराया जाएगा, जिसके बाद केंद्र शुरू करके कोर्स का संचालन होगा। केंद्र को सितंबर-अक्टूबर तक शुरू करने का प्रयास हो रहा है।
ला-मार्टीनियर ब्वॉयज में इस केंद्र को खोलने के दो मुख्य कारण है। एक तो इस कॉलेज का नाम जिनके नाम पर है मेजर जनरल क्लाउड मार्टिन वह एक फ्रेंच अधिकारी थे।
दूसरा स्कूल की ओर से इस केंद्र की स्थापना के लिए पूरा सहयोग भी दिया जा रहा है। जवाहर लाल सरीन ने बताया कि केंद्र पर न सिर्फ आम लोगों के लिए कोर्स चलाए जाएंगे बल्कि फ्रेंच के शिक्षकों को भी ट्रेंड किया जाएगा।
इस केंद्र पर बिगनर से लेकर उच्च स्तर तक फ्रेंच सिखाई जाएगी। इसके कुल छह लेवल होंगे। डेलिगेट जर्नल रामो ने बताया कि उनकी संस्था 133 साल पुरानी है जो कि 37 देशों में इस ग्लोबल भाषा का विकास कर रही है।
फ्रेंच पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी मिलेगा अवसर
फ्रेंच की शिक्षिका व फ्रेंच एम्बेसी की ओर से डीईएलएफ कोर्स की समन्वयक डॉ. मीता घोष ने बताया कि राजधानी के बहुत से स्कूल-कॉलेजों में फ्रेंच सिखाई तो जाती है, लेकिन उसका स्तर बेहतर नहीं।
इस आलियांज का एलिमेंट्री कोर्स भी उस स्तर का होगा कि छात्र फ्रेंच बोल सके। इससे इंडो-फ्रेंच कल्चरल एक्सचेंज को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक के दौरान राजधानी में फ्रेंच सीखने वालों की संख्या लगभग 70 फीसदी बढ़ी है।
केंद्र के खुलने से राजधान में फ्रेंच पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी अवसर मिलेंगे। वह इस केंद्र पर अपनी सेवाएं देंगे। प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर रिचर्ड फ्रैंको ने बताया कि कोर्स छह लेवल का होगा। प्रत्येक लेवल लगभग साढ़े तीन माह या करीब 60 घंटो का होगा।
आमतौर पर हफ्ते में चार घंटे की कक्षाएं होंगी, यदि कोई इससे अधिक समय दे सकता है तो आठ घंटे की कक्षाओं का भी विकल्प रहेगा। पहले लेवल का कोर्स करने पर छात्र को फ्रेंच बोलना आएगा जबकि छह लेवल कर लेने पर वह उसमें निपुण हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि लखनऊ और फ्रांस में कई समानताएं हैं। उन्हीं में से एक है कि दोनों ही स्थान अपने खाने के लिए मशहूर हैं। कोर्स फीस की बात करने पर रिचर्ड ने बताया कि दिल्ली में इस कोर्स के एक लेवल की फीस 15 से 18 हजार रुपये है।
हालांकि लखनऊ में यह उससे कम रखी जाएगी। यह केंद्र हफ्ते में सातों दिन काम करेगा। वर्किंग लोगों के लिए वीकेंड और ईवनिंग क्लासेज की व्यवस्था रहेगी। केंद्र शुरू होने के बाद इसके पंजीकरण ऑनलाइन किए जाएंगे।
एक बैच अधिकतम 20 स्टूडेंट्स का होगा। इस अवसर पर ला-मार्टीनियर ब्वॉयज के प्रिंसिपल सी मैकफारलैंड ने कहा कि केवल उनके स्कूल में ही 900 स्टूडेंट्स फ्रेंच सीख रहे हैं।
कॅरिअर काउंसलर अमृता दास ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच रिश्ते गहरे हो रहे हैं। इसी के तहत यहां ‘नमस्ते फ्रांस’ नामक समारोह का आयोजन तक होता है। केंद्र के खुलने से इंडो-फ्रेंच रिलेशन व कल्चर को बढ़ावा मिलेगा।