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लखनऊ यूनिवर्सिटी दे रही कॉलेजों को फर्जीवाड़े का मौका
ब्यूरो, अमर उजाला/लखनऊ
Updated Tue, 27 Jun 2017 02:48 PM IST
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उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद लविवि एक तरफ सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ कॉलेजों को शिक्षकों के अनुमोदन में फर्जीवाड़ा करने का पूरा मौका भी दे रहा है। विवि ने सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में शिक्षकों का अनुमोदन करके कार्य परिषद की बैठक में कोर्स की मान्यता जारी कर दी है।
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इसके बावजूद अभी तक उनकी सूची ऑनलाइन नहीं की गई है। अनुमोदन के बाद वही शिक्षक कॉलेज में पढ़ाएंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में फर्जीवाड़ा करने की पूरी आशंका है। स्ववित्तपोषित डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों का अनुमोदन कराकर अनर्ह शिक्षकों से शिक्षण कराने की गलत परंपरा चलती आ रही है।
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इसको देखते हुए प्रधानमंत्री से लेकर राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय से डिग्री कॉलेज के सभी शिक्षकों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन करने का निर्देश दे रखा है। लविवि ने इसके बाद कॉलेजों से उनके यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों का ब्योरा फोटोग्राफ सहित मांगा था।
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शिक्षकों का ब्योरा होगा ऑनलाइन
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इसके साथ ही कॉलेजों को उनके यहां की वेबसाइट पर भी शिक्षकों का ब्योरा अपलोड करना था। यह आदेश जारी किए हुए काफी समय बीत गया लेकिन अभी तक ज्यादातर कॉलेजों ने इसका पालन नहीं किया है।
लविवि द्वारा ढिलाई बरतने की वजह से कॉलेज अभी भी फर्जीवाड़ा करने में सफल हो रहे हैं। शिक्षकों का ब्योरा ऑनलाइन होने पर यह पता लगाना संभव होगा कि कहां-कहां गैर अनुमोदित शिक्षक स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं। कॉलेज मान्यता लेते समय अर्हता पूरी करने वाले शिक्षकों के नाम देते हैं।
अक्सर ऐसा होता है कि कॉलेज जिन शिक्षकों का अनुमोदन लेते हैं उन्हें पढ़ाई नहीं कराते। इसके बजाय कम वेतन पर अनर्ह शिक्षकों से पढ़ाई कराई जाती है। कई बार तो एक-एक शिक्षक कई कॉलेज से अनुमोदित दिखाया जाता है। विवि द्वारा खुद उनका नाम वेबसाइट पर नहीं डालने से इस फर्जीवाड़े को शह मिल रही है।
लविवि द्वारा ढिलाई बरतने की वजह से कॉलेज अभी भी फर्जीवाड़ा करने में सफल हो रहे हैं। शिक्षकों का ब्योरा ऑनलाइन होने पर यह पता लगाना संभव होगा कि कहां-कहां गैर अनुमोदित शिक्षक स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं। कॉलेज मान्यता लेते समय अर्हता पूरी करने वाले शिक्षकों के नाम देते हैं।
अक्सर ऐसा होता है कि कॉलेज जिन शिक्षकों का अनुमोदन लेते हैं उन्हें पढ़ाई नहीं कराते। इसके बजाय कम वेतन पर अनर्ह शिक्षकों से पढ़ाई कराई जाती है। कई बार तो एक-एक शिक्षक कई कॉलेज से अनुमोदित दिखाया जाता है। विवि द्वारा खुद उनका नाम वेबसाइट पर नहीं डालने से इस फर्जीवाड़े को शह मिल रही है।