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एलयू में पेट्रोलियम शोधपीठ और संग्रहालय की होगी स्थापना, ओएनजीसी देगा 1.25 करोड़ की मदद
Thu, 17 Jan 2019 03:28 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 17 Jan 2019 03:28 PM IST
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ओएनजीसी की टीम
- फोटो : amar ujala
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लविवि में पेट्रोलियम उत्पादों पर शोध के लिए ओएनजीसी शोधपीठ और संग्रहालय की स्थापना होगी। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) इसके लिए विश्वविद्यालय को पांच साल तक प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये की दर से कुल 1.25 करोड़ की आर्थिक सहायता देगा।
पेट्रोलियम पर आधारित संग्रहालय की स्थापना में भी ओएनजीसी सहयोग करेगा तथा उससे संबंधित सामग्री विवि को उपलब्ध कराएगा। लविवि में बुधवार को ओएनजीसी की टीम ने भ्रमण के बाद इसकी घोषणा की है। लविवि को इसका प्रस्ताव तैयार कर देना होगा।
विवि परिसर में ओएनजीसी से मिले 20 करोड़ रुपये की लागत से ओएनजीसी भवन का निर्माण हुआ है। इस भवन में अन्य संस्थानों के साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ जियोरिर्सोसेज की स्थापना हुई है। इसमें एक डिग्री और एक डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हैं। लविवि को इस भवन में स्थापित अन्य संस्थानों के लिए दो-दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिली है।
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लविवि के पास पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञ न होने की वजह से इस संस्थान को आर्थिक सहायता नहीं मिली थी। लविवि ने यह मुद्दा ओएनजीसी के सामने रखा था। इसके बाद ओएनजीसी इस मामले में आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। इस टीम में समन्वय निदेशक मनोज भरतवाल, जीएम फाइनेंस मेनमेन और चीफ केमिस्ट मोनू भटनागर शामिल थे। टीम ने लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह तथा संस्थान के निदेशक प्रो. ध्रुवसेन से इसका प्रस्ताव देने को कहा है।
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पेट्रोलियम पर आधारित संग्रहालय की स्थापना में भी ओएनजीसी सहयोग करेगा तथा उससे संबंधित सामग्री विवि को उपलब्ध कराएगा। लविवि में बुधवार को ओएनजीसी की टीम ने भ्रमण के बाद इसकी घोषणा की है। लविवि को इसका प्रस्ताव तैयार कर देना होगा।
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विवि परिसर में ओएनजीसी से मिले 20 करोड़ रुपये की लागत से ओएनजीसी भवन का निर्माण हुआ है। इस भवन में अन्य संस्थानों के साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ जियोरिर्सोसेज की स्थापना हुई है। इसमें एक डिग्री और एक डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हैं। लविवि को इस भवन में स्थापित अन्य संस्थानों के लिए दो-दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिली है।
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लविवि के पास पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञ न होने की वजह से इस संस्थान को आर्थिक सहायता नहीं मिली थी। लविवि ने यह मुद्दा ओएनजीसी के सामने रखा था। इसके बाद ओएनजीसी इस मामले में आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। इस टीम में समन्वय निदेशक मनोज भरतवाल, जीएम फाइनेंस मेनमेन और चीफ केमिस्ट मोनू भटनागर शामिल थे। टीम ने लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह तथा संस्थान के निदेशक प्रो. ध्रुवसेन से इसका प्रस्ताव देने को कहा है।
विशेषज्ञ की भी होगी नियुक्ति
लखनऊ यूनिर्सिटी
- फोटो : amar ujala
ओएनजीसी एकेडमी के सहयोग से चल रहा कोर्स
लविवि ने पेट्रोलियम पर आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए देहरादून के ओएनजीसी संस्थान की मदद ली है। ओएनजीसी ने कोर्स के विद्यार्थियों को प्लेसमेंट देने की बात भी कही है।
लविवि में ओएनजीसी शोधपीठ की स्थापना के बाद इसमें एक विशेषज्ञ की नियुक्ति भी होगी। यह विशेषज्ञ पेट्रोलियम के क्षेत्र में शोध करेगा तथा कोर्स का संचालन भी करेगा। इसकी नियुक्ति विवि द्वारा की जाएगी।
तैयार कर रहे प्रस्ताव
ओएनजीसी द्वारा शोधपीठ और संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव मांगना खुशी की बात है। हम इसका प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। इस संग्रहालय की खासियत होगी कि इसमें पेट्रोलियम के सभी पदार्थों, कच्चे तेल के साथ ही इससे संबंधित अन्य चार्ट भी रखे जाएंगे। - प्रो. ध्रुवसेन सिंह, इंस्टीट्यूट ऑफ जियोरिर्सोसेज
लविवि ने पेट्रोलियम पर आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए देहरादून के ओएनजीसी संस्थान की मदद ली है। ओएनजीसी ने कोर्स के विद्यार्थियों को प्लेसमेंट देने की बात भी कही है।
लविवि में ओएनजीसी शोधपीठ की स्थापना के बाद इसमें एक विशेषज्ञ की नियुक्ति भी होगी। यह विशेषज्ञ पेट्रोलियम के क्षेत्र में शोध करेगा तथा कोर्स का संचालन भी करेगा। इसकी नियुक्ति विवि द्वारा की जाएगी।
तैयार कर रहे प्रस्ताव
ओएनजीसी द्वारा शोधपीठ और संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव मांगना खुशी की बात है। हम इसका प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। इस संग्रहालय की खासियत होगी कि इसमें पेट्रोलियम के सभी पदार्थों, कच्चे तेल के साथ ही इससे संबंधित अन्य चार्ट भी रखे जाएंगे। - प्रो. ध्रुवसेन सिंह, इंस्टीट्यूट ऑफ जियोरिर्सोसेज