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एलयू में जल्द शुरू होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Mon, 12 Jun 2017 10:54 PM IST
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अब लविवि में इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी 2017-18 से शुरू हो जाएगी। इसकी आधिकारिक अनुमति मिल गई है। कुलसचिव प्रो. राजकुमार सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है, जिसे रविवार को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया गया।
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कुलसचिव के पत्र के बाद इंजीनियरिंग संकाय का सिलेबस और आर्डिनेंस 13 जून को प्रस्तावित एकेडमिक काउंसिल की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। लविवि में कंप्यूटर साइंस, केमिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में 60-60 सीटें होंगी।
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इंजीनियरिंग संकाय न्यू कैंपस स्थित न्यू साइंस फैकल्टी के भवन में चलेगा। इस भवन को एआईसीटीई के मानक के हिसाब से दुरुस्त किया जा रहा है।सभी सीटों पर दाखिले राज्य प्रवेश परीक्षा की काउंसलिंग के माध्यम से किए जाएंगे। पाठ्यक्रम में क्रेडिट पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली अपनाई जाएगी।
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आठ सेमेस्टर वाले इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में हर सेमेस्टर 48-48 क्रेडिट का होगा। ये क्रेडिट थ्योरी और प्रैक्टिकल के आधार पर तय किए जाएंगे। स्टूडेंट को पास होने के लिए कम से कम 24 क्रेडिट लाना जरूरी होगा।
विवि में इंजीनियरिंग के 15 असिस्टेंट प्रोफेसर और 9 प्रयोगशाला सहायकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। वेबसाइट पर इसका विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है। फैकल्टी इंचार्ज प्रो. आरएस गुप्ता की देखरेख में नियुक्त प्रक्रिया संपन्न होनी है।
पाठ्यक्रम शुरू, पर कम नहीं हैं चुनौतियां
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इन सभी शिक्षकों के पद और नियुक्ति संबंधी अर्हता विवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। ये सभी नियुक्तियां अनुबंध आधारित हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर को 45 हजार और प्रयोगशाला सहायक को 15 हजार रुपये मासिक मानदेय तय किया गया है।
कोर्स की जरूरत के मुताबिक लैब और क्लासरूम के लिए जरूरी सामान खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्टूडेंट की इंग्लिश दुरुस्त करने के लिए 40 लाख रुपये की लागत से लैंग्वेज लैब बनाई जा रही है।
लैंग्वेज लैब के साथ ही सात अन्य प्रयोगशालाएं- फिजिक्स, केमिस्ट्री, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, वर्कशॉप, मैकेनिकल, कम्प्यूटर और ड्राइंग लैब की स्थापना भी की जाएगी। फर्स्ट इयर के स्टूडेंट के लिए इन सभी प्रयोगशालाओं में प्रैक्टिकल अनिवार्य होगा।
लखनऊ विवि प्रशासन पूरे जोर-शोर से इंजीनियरिंग संकाय की शुरुआत करने जा रहा, लेकिन कई चुनौतियां हैं जिसे उसे दो-चार होना होगा। पूरे प्रदेश भर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का बुरा हाल है। यहां तक आधे से ज्यादा सीट खाली रहने की नौबत आती है।
ऐसे में लखनऊ विवि के सामने पहली चुनौती तो सभी 300 सीट पद दाखिले की है। दूसरी चुनौती पढ़ाई की गुणवत्ता और तीसरी सबसे बड़ी चुनौती डिग्री के बाद प्लेसमेंट कराना है।
इंजीनियरिंग संकाय के भवन को अभी एआईसीटीई का अप्रूवल नहीं मिला है। हालांकि पढ़ाई शुरू करने में फिलहाल कोई बाधा नहीं है। विवि को अगले चार साल में नए संकाय भवन को अप्रूव कराना होगा।
विवि के संकाय-
कला, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, शिक्षा, शिल्प कला, आयुर्वेद, कृषि और अब इंजीनियरिंग
कोर्स की जरूरत के मुताबिक लैब और क्लासरूम के लिए जरूरी सामान खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्टूडेंट की इंग्लिश दुरुस्त करने के लिए 40 लाख रुपये की लागत से लैंग्वेज लैब बनाई जा रही है।
लैंग्वेज लैब के साथ ही सात अन्य प्रयोगशालाएं- फिजिक्स, केमिस्ट्री, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, वर्कशॉप, मैकेनिकल, कम्प्यूटर और ड्राइंग लैब की स्थापना भी की जाएगी। फर्स्ट इयर के स्टूडेंट के लिए इन सभी प्रयोगशालाओं में प्रैक्टिकल अनिवार्य होगा।
लखनऊ विवि प्रशासन पूरे जोर-शोर से इंजीनियरिंग संकाय की शुरुआत करने जा रहा, लेकिन कई चुनौतियां हैं जिसे उसे दो-चार होना होगा। पूरे प्रदेश भर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का बुरा हाल है। यहां तक आधे से ज्यादा सीट खाली रहने की नौबत आती है।
ऐसे में लखनऊ विवि के सामने पहली चुनौती तो सभी 300 सीट पद दाखिले की है। दूसरी चुनौती पढ़ाई की गुणवत्ता और तीसरी सबसे बड़ी चुनौती डिग्री के बाद प्लेसमेंट कराना है।
इंजीनियरिंग संकाय के भवन को अभी एआईसीटीई का अप्रूवल नहीं मिला है। हालांकि पढ़ाई शुरू करने में फिलहाल कोई बाधा नहीं है। विवि को अगले चार साल में नए संकाय भवन को अप्रूव कराना होगा।
विवि के संकाय-
कला, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, शिक्षा, शिल्प कला, आयुर्वेद, कृषि और अब इंजीनियरिंग
लखनऊ विवि पर एक नजर
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लखनऊ विवि पर एक नजर-
- 1921 में स्थापित
- 02 कैंपस
-147 और 76 एकड़ जमीन
-तीन कांस्टीट्एंट कॉलेज
-एक स्वायत्त
- एक कॉलेज विद एक्सीलेंस
-159 एसोसिएट कॉलेज
- 9 संस्थान
- एक इंटरनेशनल हॉस्टल समेत 16 हॉस्टल
- 7 डेलीगेेसी
- परिसर में 25000 स्टूडेंट
- 800 शिक्षक
- 1800 नॉन टीचिंग स्टाफ
- एसोसिएट कॉलेजों में 1,25,000 विद्यार्थी
‘लविवि सरकारी कॉलेज की तरह काउंसलिंग में शामिल हो रहा है। विवि की साख की वजह से सीटें खाली रहने का प्रश्न ही नहीं है। पढ़ाई की गुणवत्ता सही होगी तो प्लेसमेंट भी अच्छा होगा। प्लेसमेंट अच्छा हो इसके लिए हम अभी सेे इंडस्ट्री को लिंक करके पढ़ाई करेंगे।’ - प्रो.एसपी सिंह कुलपति, लविवि
- 1921 में स्थापित
- 02 कैंपस
-147 और 76 एकड़ जमीन
-तीन कांस्टीट्एंट कॉलेज
-एक स्वायत्त
- एक कॉलेज विद एक्सीलेंस
-159 एसोसिएट कॉलेज
- 9 संस्थान
- एक इंटरनेशनल हॉस्टल समेत 16 हॉस्टल
- 7 डेलीगेेसी
- परिसर में 25000 स्टूडेंट
- 800 शिक्षक
- 1800 नॉन टीचिंग स्टाफ
- एसोसिएट कॉलेजों में 1,25,000 विद्यार्थी
‘लविवि सरकारी कॉलेज की तरह काउंसलिंग में शामिल हो रहा है। विवि की साख की वजह से सीटें खाली रहने का प्रश्न ही नहीं है। पढ़ाई की गुणवत्ता सही होगी तो प्लेसमेंट भी अच्छा होगा। प्लेसमेंट अच्छा हो इसके लिए हम अभी सेे इंडस्ट्री को लिंक करके पढ़ाई करेंगे।’ - प्रो.एसपी सिंह कुलपति, लविवि