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दीक्षांत समारोह: पद्मश्री अशोक चक्रधर बने भाषा विवि के ऑनरेरी प्रोफेसर , दी गई डिलीट की उपाधि
Mon, 01 Mar 2021 04:03 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 01 Mar 2021 04:03 PM IST
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दीक्षांत समारोह में डॉ. अशोक चक्रधर।
- फोटो : amar ujala
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भाषा और तकनीक के मेल से शिक्षा के समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए स्रोतों से अधिक हौसले की जरूरत होती है। विलुप्त हो रही भाषाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए तकनीकी मददगार साबित हो सकती है। ये बातें प्रख्यात लेखक व कवि पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर ने कहीं।
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वह ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने डिजिटल भारत में शब्दों का मानकीकरण करने और भाषा के शब्दकोश बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने अशोक चक्रधर के ऑनरेरी प्रोफेसर बनने की घोषणा की। उन्हें डी लिट की उपाधि दी गई।
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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने संबोधन में नई शिक्षा नीति की संकल्पना के अनुरूप भाषाओं का विकास करने और विलुप्त हो रही भाषाओं पर शोध करने की बात कही। उन्होंने कहा कि तभी भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना पूरा होगा। उन्होंने भाषा विवि को अपने यहां प्रवेश संख्या बढ़ाने का लक्ष्य दिया और इसके लिए अभी से प्रयास करने की बात कही।
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समारोह में छात्रों छात्र-छात्राओं को मेडल व डिग्री दी गई। बीए ऑनर्स की छात्रा मरियम हफीज को ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती व कुलाधिपति गोल्ड मेडल समेत 4 मेडल मिले।