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एलयू ने छात्रवृत्ति फर्जीवाड़ा रोकने के लिए की ये व्यवस्था
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 30 Oct 2017 01:57 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
लखनऊ विश्वविद्यालय और सहयुक्त डिग्री कॉलेजों में न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति की अनिवार्यता अब सख्ती से लागू की जाएगी। इसके लिए नए सत्र से बायोमीट्रिक मशीनें लगाई जाएंगी। लविवि में प्रति कुलपति, वित्त नियंत्रक और रजिस्ट्रार की संयुक्त बैठक में इस पर सहमति बन गई है।
अगले सत्र से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन बायोमीट्रिक की व्यवस्था समाज कल्याण विभाग के निर्देश की वजह से लागू कर रहा है। समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति लेने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति कम से 75 फीसदी होने की बात कही है। इसके लिए बायोमीट्रिक लगाने को कहा गया है।
समाज कल्याण विभाग से हर साल करोड़ों रुपये छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय और सहयुक्त कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को देता है। कई बार शिकायत आती है कि जिन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति या फीस प्रतिपूर्ति की जा रही है, असल में वे उन संस्थान में पढ़ते ही नहीं हैं।
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कॉलेज फर्जीवाड़ा कर उन विद्यार्थियों के हिस्से के रुपये हजम कर जाते हैं। इसलिए समाज कल्याण विभाग ने सभी विद्यार्थियों के लिए 75 फीसदी की उपस्थिति अनिवार्य की है। उपस्थिति की अनिवार्यता के सत्यापन के लिए विभाग ने बायोमीट्रिक मशीन लगाने को कहा है।
यह निर्देश इसी सत्र से लागू होना था, लेकिन सत्र शुरू होने की वजह से लविवि इसे अगले सत्र से लागू करने की तैयारी कर रहा है। बायोमीट्रिक लगाने के लिए बजट की व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती है। इसलिए विवि के पदाधिकारियों ने यह व्यवस्था अगले सत्र से लागू करने का फैसला किया है। सभी जगह उपस्थिति फिलहाल रजिस्टर पर ही हैं, इसलिए लविवि विभागध्यक्ष और कॉलेज के प्राचार्य से छात्र की उपस्थिति सत्यापित करवाकर भेजने को कहेगा।
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अगले सत्र से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन बायोमीट्रिक की व्यवस्था समाज कल्याण विभाग के निर्देश की वजह से लागू कर रहा है। समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति लेने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति कम से 75 फीसदी होने की बात कही है। इसके लिए बायोमीट्रिक लगाने को कहा गया है।
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समाज कल्याण विभाग से हर साल करोड़ों रुपये छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय और सहयुक्त कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को देता है। कई बार शिकायत आती है कि जिन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति या फीस प्रतिपूर्ति की जा रही है, असल में वे उन संस्थान में पढ़ते ही नहीं हैं।
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कॉलेज फर्जीवाड़ा कर उन विद्यार्थियों के हिस्से के रुपये हजम कर जाते हैं। इसलिए समाज कल्याण विभाग ने सभी विद्यार्थियों के लिए 75 फीसदी की उपस्थिति अनिवार्य की है। उपस्थिति की अनिवार्यता के सत्यापन के लिए विभाग ने बायोमीट्रिक मशीन लगाने को कहा है।
यह निर्देश इसी सत्र से लागू होना था, लेकिन सत्र शुरू होने की वजह से लविवि इसे अगले सत्र से लागू करने की तैयारी कर रहा है। बायोमीट्रिक लगाने के लिए बजट की व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती है। इसलिए विवि के पदाधिकारियों ने यह व्यवस्था अगले सत्र से लागू करने का फैसला किया है। सभी जगह उपस्थिति फिलहाल रजिस्टर पर ही हैं, इसलिए लविवि विभागध्यक्ष और कॉलेज के प्राचार्य से छात्र की उपस्थिति सत्यापित करवाकर भेजने को कहेगा।
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शिक्षकों के लिए रजिस्टर भी नहीं
डेमो
- फोटो : डेमो
समाज कल्याण विभाग ने विवि के साथ ही डिग्री कॉलेज में भी बायोमीट्रिक लगाने का निर्देश दिया है। विवि और अनुदानित कॉलेज सेल्फ फाइनेंस कोर्स चलाकर कमाई कर लेते हैं। जबकि राजकीय कॉलेजों के पास सेल्फ फाइनेंस कोर्स नहीं हैं। इस वजह से उनके पास बजट की कमी रहती है। ऐसे में बायोमीट्रिक लगवाना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
डिग्री कॉलेजों को सहयुक्तता देने वाले लविवि में शिक्षकों की उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक तो दूर साधारण रजिस्टर तक नहीं है। बायोमीट्रिक मशीन लगने से विद्यार्थियों की उपस्थिति भले सुधर जाए पर शिक्षकों की उपस्थिति में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। लविवि में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं कराई जाती है। इसको लेकर कई बार मांग उठाई गई, लेकिन शिक्षकों के विरोध की वजह से कोई भी कुलपति व्यवस्था शुरू नहीं कर सका।
पूर्व कुलपति जी. पटनायक ने अपने कार्यकाल के दौरान आंशिक रूप से यह व्यवस्था शुरू की थी। उस समय भी शिक्षकों को अपनी उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज नहीं करनी थी। इसके बजाय शिक्षकों को पढ़ाई गई हर कक्षा का ब्योरा और क्लास लेने वाले स्टूडेंट्स के नाम देने थे। इस तरह से उनकी उपस्थिति भी दर्ज हो जा रही थी। उनके जाते ही यह व्यवस्था भी बंद हो गई।
समाज कल्याण विभाग केे निर्देश के बाद विवि में बायोमीट्रिक लगाने के लिए बैठक की गई थी। वर्तमान सत्र में बायोमीट्रिक लगाना संभव नहीं है। इसलिए नए सत्र में इसकी शुरुआत की जाएगी। इस साल छात्रों की उपस्थिति सत्यापित करके समाज कल्याण विभाग को भेजी जाएगी। - प्रो. राजकुमार सिंह कुलसचिव, लविवि
डिग्री कॉलेजों को सहयुक्तता देने वाले लविवि में शिक्षकों की उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक तो दूर साधारण रजिस्टर तक नहीं है। बायोमीट्रिक मशीन लगने से विद्यार्थियों की उपस्थिति भले सुधर जाए पर शिक्षकों की उपस्थिति में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। लविवि में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं कराई जाती है। इसको लेकर कई बार मांग उठाई गई, लेकिन शिक्षकों के विरोध की वजह से कोई भी कुलपति व्यवस्था शुरू नहीं कर सका।
पूर्व कुलपति जी. पटनायक ने अपने कार्यकाल के दौरान आंशिक रूप से यह व्यवस्था शुरू की थी। उस समय भी शिक्षकों को अपनी उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज नहीं करनी थी। इसके बजाय शिक्षकों को पढ़ाई गई हर कक्षा का ब्योरा और क्लास लेने वाले स्टूडेंट्स के नाम देने थे। इस तरह से उनकी उपस्थिति भी दर्ज हो जा रही थी। उनके जाते ही यह व्यवस्था भी बंद हो गई।
समाज कल्याण विभाग केे निर्देश के बाद विवि में बायोमीट्रिक लगाने के लिए बैठक की गई थी। वर्तमान सत्र में बायोमीट्रिक लगाना संभव नहीं है। इसलिए नए सत्र में इसकी शुरुआत की जाएगी। इस साल छात्रों की उपस्थिति सत्यापित करके समाज कल्याण विभाग को भेजी जाएगी। - प्रो. राजकुमार सिंह कुलसचिव, लविवि