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संस्कृत स्कूलों में भी होगी इन सब्जेक्ट्स की पढ़ाई, जानकारी के लिए एक नजर डालें इस खबर पर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 17 Apr 2018 02:38 PM IST
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यूपी में संस्कृत विद्यालयों के छात्र भी अब विज्ञान, कला और वाणिज्य की पढ़ाई कर सकेंगे। मौजूदा समय में यहां इन विषयों की पढ़ाई नहीं होती है। इतना ही नहीं, अंग्रेजी विषय भी अनिवार्य कर दिया जाएगा।
अभी तक यह ऐच्छिक है। इसके लिए उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की पाठ्यक्रम समिति ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत परिषद के स्कूलों में माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की तरह पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी है।
माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव दीप चंद ने बताया कि 19 अप्रैल की होनी वाली परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाकर शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
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बता दें, पिछले साल प्रदेश में भाजपा सरकार ने सत्ता संभालते ही माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद में बदलाव के संकेत दे दिए थे। इसके तहत परिषद का पुनर्गठन किया गया।
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अभी तक यह ऐच्छिक है। इसके लिए उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की पाठ्यक्रम समिति ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत परिषद के स्कूलों में माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की तरह पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी है।
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माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव दीप चंद ने बताया कि 19 अप्रैल की होनी वाली परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाकर शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
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बता दें, पिछले साल प्रदेश में भाजपा सरकार ने सत्ता संभालते ही माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद में बदलाव के संकेत दे दिए थे। इसके तहत परिषद का पुनर्गठन किया गया।
अंग्रेजी की पढ़ाई भी होगी अनिवार्य
इसके बाद परिषद ने संस्कृत के पारंपरिक पाठ्यक्रम में बदलाव करने के निर्देश दिया। जिससे संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थी भी आधुनिक पढ़ाई कर सकें और प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो सकें।
वर्तमान में प्रदेश में माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से संबद्ध 1171 विद्यालय हैं। इनमें से दो राजकीय और 973 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं। जबकि लखनऊ मंडल में 48 सहायता प्राप्त व 18 वित्तविहीन संस्कृत विद्यालय हैं।
मौजूदा समय में संस्कृत विद्यालयों में अंग्रेजी की पढ़ाई ऐच्छिक है। इसमें सिर्फ उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। जबकि प्रस्तावित पाठ्यक्रम में अंग्रेजी को अनिवार्य विषय बनाया जा रहा है।
ऐसे में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के कुल प्राप्तांक में अंग्रेजी विषय का अंक भी शामिल होगा। उप निरीक्षक संस्कृत पाठशालाएं रेनू वर्मा ने बताया कि अब द्वितीय पेपर के अनिवार्य भाषा एवं व्याकरण के विषय में हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत का एक ही पेपर होगा।
इसमें हिंदी 40 अंकों का और संस्कृत व अंग्रेजी 30-30 अंकों का होगा। बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम लाने के लिए अब छात्रों को अंग्रेजी में भी अच्छे अंक लाने होंगे।
वर्तमान में प्रदेश में माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से संबद्ध 1171 विद्यालय हैं। इनमें से दो राजकीय और 973 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं। जबकि लखनऊ मंडल में 48 सहायता प्राप्त व 18 वित्तविहीन संस्कृत विद्यालय हैं।
मौजूदा समय में संस्कृत विद्यालयों में अंग्रेजी की पढ़ाई ऐच्छिक है। इसमें सिर्फ उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। जबकि प्रस्तावित पाठ्यक्रम में अंग्रेजी को अनिवार्य विषय बनाया जा रहा है।
ऐसे में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के कुल प्राप्तांक में अंग्रेजी विषय का अंक भी शामिल होगा। उप निरीक्षक संस्कृत पाठशालाएं रेनू वर्मा ने बताया कि अब द्वितीय पेपर के अनिवार्य भाषा एवं व्याकरण के विषय में हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत का एक ही पेपर होगा।
इसमें हिंदी 40 अंकों का और संस्कृत व अंग्रेजी 30-30 अंकों का होगा। बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम लाने के लिए अब छात्रों को अंग्रेजी में भी अच्छे अंक लाने होंगे।