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आयुष में 2,400 से अधिक सीटें खाली, इस वजह से नहीं मिल रहे स्टूडेंट्स
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 10 Oct 2018 04:35 PM IST
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होम्योपैथी, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में प्रवेश के लिए तीसरी काउंसलिंग में 2,400 से अधिक सीटें खाली हैं। जबकि मंगलवार देर रात तक लगभग 1600 अभ्यार्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। यदि इनमें से सभी प्रवेश लिया तो भी आयुष मेडिकल कॉलेजों की लगभग 800 सीटें खाली रह जाएंगी।
आयुष मेडिकल कॉलेजों में बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस में प्रवेश के लिए तीसरी काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है। मंगलवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन पंजीकरण का समय है। आयुर्वेद निदेशालय के अनुसार देर रात तक लगभग 1600 पंजीकरण हुए हैं।
इन सभी अभ्यर्थियों को 10, 11 अक्तूबर को उनके मनपसंद पाठ्यक्रम और मेडिकल कॉलेज में विकल्प चुनने का मौका मिलेगा। इसकेबाद सीटों का आवंटन किया जाएगा। तीसरी काउंसलिंग में सीटों के सापेक्ष कम अभ्यर्थी आने मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह जाने की संभावना है।
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आयुष मेडिकल कॉलेजों में बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस में प्रवेश के लिए तीसरी काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है। मंगलवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन पंजीकरण का समय है। आयुर्वेद निदेशालय के अनुसार देर रात तक लगभग 1600 पंजीकरण हुए हैं।
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इन सभी अभ्यर्थियों को 10, 11 अक्तूबर को उनके मनपसंद पाठ्यक्रम और मेडिकल कॉलेज में विकल्प चुनने का मौका मिलेगा। इसकेबाद सीटों का आवंटन किया जाएगा। तीसरी काउंसलिंग में सीटों के सापेक्ष कम अभ्यर्थी आने मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह जाने की संभावना है।
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चार मेडिकल कॉलेज काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े
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- फोटो : amar ujala
जबकि मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को भी चार मेडिकल कॉलेज हाईकोर्ट के आदेश से काउसंलिंग प्रक्रिया से जुड़ गए हैं। उधर, ऑनलाइन पंजीकरण कम होने का कारण परसेंटाइल को कम न करना माना जा रहा है। 2018-19 सत्र के लिए सामान्य वर्ग के लिए 50 और ओबीसी-एससीएसटी के लिए 40 परसेंटाइल प्रवेश के लिए रखा गया है।
जबकि 2007-18 में यह 30 था। इस वर्ष आयुष मंत्रालय द्वारा परसेंटाइल न घटाने से अभ्यर्थियों की संख्या भी घट गई है। वहीं 2017-18 में लखनऊ विश्वविद्यालय की गलती से आखिरी काउसंलिंग नहीं हुई थी। इसके चलते भी सैकड़ों छात्र प्रवेश से वंचित रह गए थे।
जबकि 2007-18 में यह 30 था। इस वर्ष आयुष मंत्रालय द्वारा परसेंटाइल न घटाने से अभ्यर्थियों की संख्या भी घट गई है। वहीं 2017-18 में लखनऊ विश्वविद्यालय की गलती से आखिरी काउसंलिंग नहीं हुई थी। इसके चलते भी सैकड़ों छात्र प्रवेश से वंचित रह गए थे।