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लखनऊ विश्वविद्यालय: प्रवेश दिया, फॉर्म भरवाया, परीक्षा से पहले कहा-कोर्स बंद
Sun, 24 Jan 2021 02:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2021 02:28 PM IST
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लखनऊ यूनिवर्सिटी
- फोटो : amar ujala
लखनऊ विश्वविद्यालय के एमएससी एनवायरमेंटल साइंस में प्रवेश की चाहत में विद्यार्थियों ने आवेदन फॉर्म भरा, प्रवेश परीक्षा दी, मेरिट में नाम आकर सेलेक्ट भी हो गए। लविवि से एसएमएस मिलने के बाद विद्यार्थियों ने फीस भी जमा की और परीक्षा फॉर्म भरने के बाद विद्यार्थी परीक्षा का इंतजार करने लगे। इसके बाद अचानक उनको मेसेज भेजा गया कि उनका पाठ्यक्रम इस साल नहीं चलेगा। वे फीस वापस ले लें या फिर दूसरे पाठ्यक्रम में दाखिला ले लें। इस बारे में जब विश्वविद्यालय से बात की गई तो प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में सोमवार को बैठक बुलाई गई है, जो भी फैसला लिया जाएगा उससे विद्यार्थियों को अवगत करा दिया जाएगा।
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लखनऊ विवि के दाखिले इस साल काफी लेट हो गए हैं। परास्नातक स्तर पर लविवि में अंतिम चरण की फीस जनवरी के पहले सप्ताह में जमा हुई है। पढ़ाई शुरू होने से पहले ही परीक्षा फॉर्म भी भर लिए गए हैं। विश्वविद्यालय के मेसेज के बाद विद्यार्थियों की समझ मे नहीं आ रहा है कि वे क्या करें। विद्यार्थियों ने लविवि से एमएससी एनवायरमेंटल साइंस में दाखिला लेने के लिए अन्य संस्थानों में अपनी सीट छोड़ दी है।
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दरअसल, एमएससी एनवायरमेंटल साइंस का पाठ्यक्रम स्ववित्तपोषित प्रणाली पर संचालित है। नियमों के अनुसार स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम संचालित होने के लिए 60 फीसदी सीट भरनी जरूरी हैं। कोर्स में इस साल 40 सीट पर आवेदन मांगे गए थे, इस हिसाब से 24 सीट पर दाखिले होने पर पाठ्यक्रम का संचालन होना था, लेकिन 18 विद्यार्थियों ने ही फीस जमा कराई थी। लविवि ने अभ्यर्थियों को इस बात की सूचना ही नहीं दी कि पाठ्यक्रम में 60 फीसदी सीटें नहीं भरी हैं। इसके बजाय उनको फीस जमा करने को कहा गया।
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पहले 40 फीसदी पर संचालित होते थे पाठ्यक्रम
लविवि में इस समय स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में 60 फीसदी सीट भरने पर कोर्स का संचालन किया जाता है। इसकी वजह यह है कि कोर्स की फीस से ही पाठ्यक्रम का खर्च निकाला जाता है। लविवि ने यह नियम दो साल पहले ही बनाया है। इससे पहले 40 फीसदी सीट भरने पर ही कोर्स का संचालन किया जाता था। इस नियम में बदलाव की वजह से लविवि में हर साल काफी कोर्स बंद हो रहे हैं।