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बीबीएयूः छह करोड़ कमाई, फिर भी आउटसोर्सिंग के शिक्षकों से पढ़ाई
Thu, 12 Sep 2019 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
अक्षय कुमार/अमर उजाला. लखनऊ
अक्षय कुमार/अमर उजाला. लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Sep 2019 12:06 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में बीटेक कोर्स की बदहाली खत्म नहीं हो रही है। विवि प्रशासन की इस कोर्स से सालाना लगभग छह करोड़ रुपये फीस के रूप में कमाई होती है, बावजूद इसके आज तक यहां एक नियमित शिक्षक की तैनाती नहीं हो सकी है।
लैब भी खस्ताहाल है और कंप्यूटर, केमिकल आदि की सुविधा नहीं है। विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट की भी कोई व्यवस्था नहीं है। विवि ने वर्ष 2013 में बीटेक स्ववित्तपोषित कोर्स के रूप में शुरू किया।
तब कहा गया कि जल्द विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षक व लैब की सुविधा दी जाएगी, लेकिन इस पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। पूर्व में कोर्स की प्रमाणिकता को लेकर हुए आंदोलन के बाद विभाग का नाम यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईआईटी) कर दिया गया।
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किंतु इसे इतने साल बाद भी अपनी बिल्डिंग नहीं मिल पाई है। कोर्स पूर्व के परीक्षा विभाग की बिल्डिंग में ही चल रहा है। हालत यह है कि यहां पर्याप्त कक्षाएं भी नहीं हैं।
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लैब भी खस्ताहाल है और कंप्यूटर, केमिकल आदि की सुविधा नहीं है। विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट की भी कोई व्यवस्था नहीं है। विवि ने वर्ष 2013 में बीटेक स्ववित्तपोषित कोर्स के रूप में शुरू किया।
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तब कहा गया कि जल्द विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षक व लैब की सुविधा दी जाएगी, लेकिन इस पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। पूर्व में कोर्स की प्रमाणिकता को लेकर हुए आंदोलन के बाद विभाग का नाम यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईआईटी) कर दिया गया।
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किंतु इसे इतने साल बाद भी अपनी बिल्डिंग नहीं मिल पाई है। कोर्स पूर्व के परीक्षा विभाग की बिल्डिंग में ही चल रहा है। हालत यह है कि यहां पर्याप्त कक्षाएं भी नहीं हैं।
नियमित शिक्षकों व लैब के लिए विद्यार्थियों ने किया आंदोलन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
परीक्षा विभाग के लिए बनाए बड़े-बड़े हॉल में ही कक्षाएं चल रही हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि कमरों में गर्मी के चलते पढ़ाई करना मुश्किल होता है। एसी काफी समय से खराब हैं। कई बार शिकायत की, पर कार्रवाई नहीं हुई।
पिछले साल नियमित शिक्षकों व लैब के लिए विद्यार्थियों ने आंदोलन भी किया। किंतु उस समय भी कोरा आश्वासन ही मिला। नए सत्र में लगभग 32 शिक्षक आउटसोर्सिंग पर रखे गए हैं, जबकि ये भी पर्याप्त नहीं हैं।
नए सत्र में फिर उसी पटरी से उतरी व्यवस्थाओं के साथ पढ़ाई शुरू कर दी गई है। इसे लेकर विद्यार्थियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि वे इतना भारी भरकम शुल्क देते हैं, कम से कम उन्हें मूलभूत सुविधाएं तो दी जाएं।
पिछले साल नियमित शिक्षकों व लैब के लिए विद्यार्थियों ने आंदोलन भी किया। किंतु उस समय भी कोरा आश्वासन ही मिला। नए सत्र में लगभग 32 शिक्षक आउटसोर्सिंग पर रखे गए हैं, जबकि ये भी पर्याप्त नहीं हैं।
नए सत्र में फिर उसी पटरी से उतरी व्यवस्थाओं के साथ पढ़ाई शुरू कर दी गई है। इसे लेकर विद्यार्थियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि वे इतना भारी भरकम शुल्क देते हैं, कम से कम उन्हें मूलभूत सुविधाएं तो दी जाएं।
एक साल में दो छात्रों को प्लेसमेंट
सांकेतिक तस्वीर
लैब की कमी, मशीनें खराब
कोर्स में हर सेमेस्टर के ब्रांच के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग लैब की जरूरत है। पहले साल के विद्यार्थियों की फिजिक्स-केमेस्ट्री की एक ही लैब है। दूसरे साल के विद्यार्थियों के लिए अलग लैब है, लेकिन उसके बाद बेहतर लैब की व्यवस्था नहीं है।
जो लैब है भी, उसमें संसाधन की कमी है। मैकेनिकल और सिविल ब्रांच की मशीनें खराब हैं। यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन, ग्राइंडर, वेल्डिंग मशीन काफी दिनों से वर्कशॉप में खराब पड़ी हैं। कंप्यूटर लैब के कंप्यूटर भी काफी पुराने हैं।
एक साल में दो छात्रों को प्लेसमेंट
विवि में बीटेक विद्यार्थियों के कैंपस प्लेसमेंट की व्यवस्था की बानगी पिछले साल के आंकड़ों में देखी जा सकती है। पिछले वर्ष एक कैंपस इंटरव्यू जारो कंपनी की ओर से कराया गया।
इसमें दो विद्यार्थियों को 12 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला। इसके बाद कोई अन्य कंपनी नहीं आई। इसी तरह 2017 में टीसीएस ने इंटरव्यू किए और कोई दूसरी कंपनी नहीं आई। विभाग की अपनी प्लेसमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है।
कोर्स में हर सेमेस्टर के ब्रांच के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग लैब की जरूरत है। पहले साल के विद्यार्थियों की फिजिक्स-केमेस्ट्री की एक ही लैब है। दूसरे साल के विद्यार्थियों के लिए अलग लैब है, लेकिन उसके बाद बेहतर लैब की व्यवस्था नहीं है।
जो लैब है भी, उसमें संसाधन की कमी है। मैकेनिकल और सिविल ब्रांच की मशीनें खराब हैं। यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन, ग्राइंडर, वेल्डिंग मशीन काफी दिनों से वर्कशॉप में खराब पड़ी हैं। कंप्यूटर लैब के कंप्यूटर भी काफी पुराने हैं।
एक साल में दो छात्रों को प्लेसमेंट
विवि में बीटेक विद्यार्थियों के कैंपस प्लेसमेंट की व्यवस्था की बानगी पिछले साल के आंकड़ों में देखी जा सकती है। पिछले वर्ष एक कैंपस इंटरव्यू जारो कंपनी की ओर से कराया गया।
इसमें दो विद्यार्थियों को 12 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला। इसके बाद कोई अन्य कंपनी नहीं आई। इसी तरह 2017 में टीसीएस ने इंटरव्यू किए और कोई दूसरी कंपनी नहीं आई। विभाग की अपनी प्लेसमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है।
बारिश में भर जाता है रास्ते में पानी
बीबीएयू
बारिश में भर जाता है रास्ते में पानी
अपनी व्यवस्थित बिल्डिंग न होने से विद्यार्थियों को कई दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। बारिश में विभाग के सामने मैदान में पानी भर जाता है। विद्यार्थियों को इससे होकर जाना पड़ता है। कक्षाओं के अतिरिक्त विद्यार्थियों के बैठने या लाइब्रेरी आदि की व्यवस्था नहीं है। पार्किंग का भी अभाव है। उच्च अधिकारी भी कम ही विभाग आते हैं।
कुछ नई लैब प्रस्तावित हैं। एसी ठीक करवाए जा रहे हैं। यूआईईटी का अपना प्लेसमेंट सेल शुरू करने का प्रस्ताव है। शिक्षकों के पद भी यूजीसी को स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं। नए सत्र में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देंगे। - डॉ. रचना गंगवार, प्रवक्ता, बीबीएयू
अपनी व्यवस्थित बिल्डिंग न होने से विद्यार्थियों को कई दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। बारिश में विभाग के सामने मैदान में पानी भर जाता है। विद्यार्थियों को इससे होकर जाना पड़ता है। कक्षाओं के अतिरिक्त विद्यार्थियों के बैठने या लाइब्रेरी आदि की व्यवस्था नहीं है। पार्किंग का भी अभाव है। उच्च अधिकारी भी कम ही विभाग आते हैं।
कुछ नई लैब प्रस्तावित हैं। एसी ठीक करवाए जा रहे हैं। यूआईईटी का अपना प्लेसमेंट सेल शुरू करने का प्रस्ताव है। शिक्षकों के पद भी यूजीसी को स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं। नए सत्र में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देंगे। - डॉ. रचना गंगवार, प्रवक्ता, बीबीएयू