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अब कितने भी पेपर में हो बैक नहीं रुकेगा क्लास प्रमोशन

Wed, 26 Oct 2016 07:07 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 26 Oct 2016 07:07 PM IST
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back paper will not affect class promotion
डेमो

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विवि ने स्नातक छात्रों की क्लास प्रमोशन व्यवस्था बदलकर उन्हें बड़ी राहत दी है। अब छात्र कितने ही विषयों में बैक पेपर ले आए उसका क्लास प्रमोशन नहीं रुकेगा। नई व्यवस्था वर्तमान सत्र से ही लागू हो गई है।

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इसके अलावा यह भी निर्णय लिया है कि अब स्पेशल बैक पेपर एग्जाम नहीं होंगे, बल्कि सेमेस्टर के अंत में ही मुख्य परीक्षाओं के साथ होंगे। अभी तक हर साल कुछ छात्र स्पेशल बैक पेपर परीक्षा का दबाव बनाते थे, जिससे व्यवस्था बिगड़ती थी।
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वैसे तो विवि इस व्यवस्था को पीजी कोर्सेज में भी लागू करना चाहता था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों व विभागों की आपत्ति के चलते ऐसा हो न सका। कुछ समय पहले विवि ने प्रो. विपिन सक्सेना की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर क्लास प्रमोशन के नियमों में बदलाव का काम सौंपा था।
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कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नियमों में बदलाव कर दिया गया है। प्रो. विपिन ने बताया कि विवि में पहले यह नियम था कि छात्र को अगली कक्षा में जाने के लिए पूरे साल में न्यूनतम 4.0 क्यूमुलेटिव ग्रेड पॉइंट एवरेज (सीजीपीए) लाना होता था।

 

साथ ही प्रत्येक वर्ष के दोनों सेमेस्टर में न्यूनतम 50 फीसदी पेपर क्लियर करने होते थे। उदाहरण के लिए यदि किसी सेमेस्टर में 10 पेपर हैं और वह छह में बैक पेपर लाता है तो उसका अगली क्लास में प्रमोशन नहीं होगा।

छात्र को न्यूनतम पांच पेपर क्लियर करने ही होंगे, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब छात्र अपने कोर्स के पूरे ड्यूरेशन में कभी भी इन पेपर को क्लियर कर सकता है।

विवि को होता था लाखों रुपये की फीस का नुकसान

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जैसे बीटेक के चार साल के कोर्स को पूरा करने के लिए अधिकतम आठ साल और अन्य तीन साल के स्नातक कोर्स को पूरा करने के लिए छह साल का समय होता है। छात्र को इस अधिकतम समय के दौरान अपनी सभी बैक क्लियर करनी है। इस दौरान उसे अंत तक कहीं भी रोका नहीं जाएगा।

असल में पुराने नियमों में विवि को हर साल लाखों रुपये की फीस का नुकसान होता था। समाज कल्याण विभाग के नियमों के अनुसार छात्रवृत्ति का लाभ केवल क्लास प्रमोशन पर ही दिया जाता है। यदि कोई फेल हुआ तो लाभ नहीं मिलेगा। 

विवि में आरक्षित वर्ग के छात्रों का दाखिला बिना फीस लिए होता है। बाद में इनकी फीस समाज कल्याण विभाग से  मिलती है। कमेटी में शामिल एक सदस्य ने बताया कि पिछले सत्र में ही बीटेक के करीब 38 छात्र थे जिनकी 50 फीसदी से अधिक पेपर में बैक थी। 

मजबूरन उनका क्लास प्रमोशन नहीं हुआ और समाज कल्याण विभाग ने शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की, जबकि छात्र विवि में पढ़ते रहे। इसके चलते इन छात्रों की एक साल की फीस जो कि 40 लाख से अधिक होती है वह मिलने में समस्या आई। 

इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर नियमों में बदलाव हुआ है। क्लास प्रमोशन होने से शुल्क प्रतिपूर्ति हो जाएगी। प्रो. विपिन सक्सेना ने बताया कि फिलहाल यह व्यवस्था स्नातक स्तर पर संचालित बीटेक, बीसीए, बीए, बीकॉम, बीएससी आईटी, बीबीए सहित अन्य कोर्स में लागू हुई है।
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