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होम्योपैथिक-आयुर्वेदिक चिकित्सकों की भी ड्यूटी लगे कोरोना से बचाव अभियान में

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2020 05:18 PM IST
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ayurved and homoeopathy doctors asked for permission
- फोटो : AMAR UJALA
माई सिटी रिपोर्टर   लखनऊ। राजधानी के होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सक भी मरीजों के इलाज के लिए तत्पर हैं। उनका कहना है कि कोरोनावायरस की वजह से आई महामारी में सहयोग करने के लिए वह हर स्तर पर तैयार हैं । सरकार उन्हें मौका दे। होम्योपैथी चिकित्सकों का कहना है कि लक्षण के आधार पर होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति सबसे कारगर मानी गई है।  इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। इसलिए होम्योपैथी चिकित्सकों को भी इस अभियान में लगाया जाए।  राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर अरविंद कुमार वर्मा बताते हैं कि होम्योपैथिक विभाग में करीब 1400 डॉक्टर व शिक्षक कार्यरत हैं। 36 पीजी के छात्र हैं। बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर हैं। कोरोना पीड़ितों का इलाज लक्षण के आधार पर किया जा रहा है।  इसमें होम्योपैथी कार्य कर हो सकती है। कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 3 से 400 मरीज सर्दी जुकाम बुखार से पीड़ित आ रहे हैं इन्हें दवाएं दी जा रही हैं और वे ठीक होकर लौट रहे हैं।  बड़ी संख्या में लोग क्वॉरेंटाइन है ऐसे लोगों के इलाज की जिम्मेदारी होम्योपैथी चिकित्सकों को दी जानी चाहिए,  जिससे क्वारन्टीन लोगों को संभाला जा सके। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से निर्देश मिलते ही कॉलेज हर स्तर पर अपनी सहभागिता निभाएगा।  केंद्रीय होम्योपैथी काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉक्टर अनिरुद्ध वर्मा कहते हैं कि होम्योपैथी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। ऐसे में इसके चिकित्सकों को भी कोरोना वायरस पीड़ितों अथवा जो लोग नेगेटिव आ गए हैं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अभियान में लगाया जाना चाहिए। 
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आयुष को भी लगाएं अभियान में आयुष विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि आयुर्वेद और यूनानी में तमाम दवाएं ऐसी हैं जो लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है ।ऐसी स्थिति में इन चिकित्सकों को गांव गांव जिम्मेदारी दी जानी चाहिए । वह हर गांव में जाएं और लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने संबंधी दवाएं दें और घरेलू उपचार के बारे में जानकारी दें।  इससे लोगों में कोरोना को लेकर भय दूर होगा और इसके फैलाव पर रोक लगेगी।   
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