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93 फीसदी एमबीए ग्रेजुएट नौकरी के लायक नहीं

Thu, 28 Apr 2016 03:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 28 Apr 2016 03:49 PM IST
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assocham report on MBA graduates.

देश के साढ़े पांच हजार बिजनेस मैनेजमेंट स्कूलों से ग्रेजुएट होने वालों में 93 फीसदी स्टूडेंट्स नौकरी के लायक नहीं हैं। यहां से निकलने वाले छात्रों को 10 हजार रुपये मासिक की नौकरी मिलनी भी मुश्किल है।

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इसका खुलासा बुधवार को जारी एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) की रिपोर्ट में हुआ। इसके लिए बिजनेस स्कूलों की घटिया क्वालिटी और खराब नियमन को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक महज सात फीसदी एमबीए ग्रेजुएट किसी जगह नौकरी करने के काबिल हैं।
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एसोसिएशन की एजूकेशन कमेटी द्वारा यह रिपोर्ट लखनऊ सहित देश के सभी प्रमुख शहरों के हालात के आधार पर तैयार की गई है।

कोर्स पूरा होने के बाद नौकरी तलाशना मुश्किल

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रिपोर्ट में बताया गया है कि आईआईएम और कुछ सरकारी संस्थानों समेत देश के टॉप 20 बिजनेस स्कूलों को अलग कर दें तो कोर्स पूरा होने के बाद नौकरी तलाशना बाकी संस्थानों के युवाओं के लिए एक चुनौती है।

जबकि बिजनेस स्कूल एमबीए कोर्स के लिए तीन से पांच लाख रुपए तक की फीस ले रहे हैं। जब कैंपस प्लेसमेंट होता भी है तो स्टूडेंट्स को महज 8 से 10 हजार रुपये महीने की नौकरी दी जाती है। वहीं इन साढ़े पांच हजार के अलावा बहुत से संस्थान तो मान्यता प्राप्त भी नहीं हैं।

एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि इन संस्थान में जितनी सीटें हैं, उससे कहीं कम उन्हें लेने वाले हैं। वर्ष 2011-12 में देश में एमबीए जैसे कोर्स के लिए 3.6 लाख सीटें थीं, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 5.20 लाख हो गईं। शिक्षण की क्वालिटी कॉर्पोरेट जगत की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होने से भी ये हालात बन रहे हैं।

220 संस्थान बंद हुए, और 120 भी होंगे

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रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू, अहमदाबाद, हैदराबाद और देहरादून जैसे शहरों में पिछले दो वर्षों में मैनेजमेंट शिक्षा दे रहे 220 संस्थान बंद हो गए। 2016 में ऐसे 120 और संस्थानों के बंद होने की आशंका है।

कैंपस प्लेसमेंट में 45 फीसदी की गिरावट
2014 से 2016 तक अर्थव्यवस्था के कमजोर रहने और शिक्षा की खराब गुणवत्ता के कारण कैंपस रिक्रूटमेंट में सीधे तौर पर 45 प्रतिशत की औसत गिरावट सभी संस्थानों में दर्ज की गई है।

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आईआईएम-आईआईटी की क्वालिटी भी गिरी

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रिपोर्ट में आईआईएम और आईआईटी जैसे संस्थानों से निकल रहे स्टूडेंट्स की शैक्षिक क्वालिटी पर चिंता जताई गई है। इसकी वजह अच्छी फैकल्टी और फ्रेस ग्रेजुएट्स को सही ट्रेनिंग का नहीं मिलना है। दरअसल, शिक्षा क्षेत्र में कम वेतन होने के चलते क्वालिटी शिक्षक यहां आना नहीं चाहते।

इंजीनियरिंग : 97 प्रतिशत को चाहिए आईटी में जॉब
देश में तैयार हो रहे इंजीनियरों में से करीब 97 फीसदी आईटी सेक्टर में जॉब पाना चाहते हैं। जबकि 18.43 प्रतिशत ही यहां काम करने के योग्य हैं। हालांकि 7.49 प्रतिाश्त कोर इंजीनियरिंग के लायक हैं। नतीजतन समाज व अभिभावकों के दबाव की वजह से इंजीनियर बनने को मजबूर हुए युवाओं के लिए व्यापक नौकरियां नहीं हैं।

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