लखनऊ विश्वविद्यालय: पीजी के दाखिलों में भी बेटियां अव्वल
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जहां एक ओर रियो ओलंपिक में बेटियां देश का नाम रोशन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर देश में भी हर क्षेत्र में अपनी खुद को अव्वल साबित कर रही हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की बात करें तो बेटियों ने यहां भी छात्रों को पछाड़ दिया है।
बीबीए और बीकॉम ऑनर्स के बाद अब पीजी स्तर पर भी दाखिला पाने वालों में छात्राओं की संख्या छात्रों से कहीं अधिक है। एलयू में हाल ही में हुए पीजी कोर्सेज में दाखिला पाने वालों में 58 फीसदी से अधिक छात्राएं शामिल हैं।
वहीं, छात्रों की संख्या 42 फीसदी ही है। विवि के प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा ने बताया कि इस साल पीजी के कुल 3755 दाखिले हुए हैं। इसमें 2186 छात्राओं ने जबकि 1569 छात्रों ने प्रवेश लिया है।
मालूम हो कि इस साल बीबीए व बीकॉम ऑनर्स में भी छात्राओं ने छात्रों को पटखनी दी है। इनमें 60.53 फीसदी छात्राओं ने दाखिला लिया तो मात्र 39.47 छात्र ही प्रवेश पा सके।
समाज कार्य से लेकर राजनीति तक में जलवा
विवि के कुछ पॉपुलर सब्जेक्ट्स की बात करें तो उनमें छात्राओं की संख्या छात्रों से कहीं अधिक है।
एमए इंग्लिश में जहां 84 फीसदी के करीब छात्राओं ने दाखिला लिया है, वहीं एमकॉम कॉमर्स में 81 फीसदी से अधिक और एमएससी जूलोजी में 78 फीसदी छात्राओं का प्रवेश हुआ। मास्टर्स इन सोशल वर्क कोर्स में 59.14 फीसदी छात्राओं ने दाखिला लिया है।
छात्राओं का रुझान राजनीति में भी कुछ कम नहीं। वह इसमें भी छात्रों को टक्कर दे रही हैं। एमए राजनीति शास्त्र की बात करें तो छात्राओं की संख्या छात्रों से कुछ ही कम है।
इस कोर्स की कुल 120 सीटों में से 58 (48.33 फीसदी) छात्राएं हैं जबकि 62 (51.67 फीसदी) छात्र, यानी इस कोर्स में भी छात्राएं केवल कुछ ही कदम पीछे रह गई हैं।
स्नातक में पिछड़ीं, लेकिन पीजी में पछाड़ा
एलयू में हाल ही में हुए स्नातक दाखिलों की बात करें तो छात्राओं की संख्या काफी कम रही। विभिन्न कोर्स में मिलाकर 1856 (62.39 फीसदी) छात्रों ने दाखिला लिया, जबकि छात्राओं में मात्र 1119 (37.61 फीसदी) प्रवेश ही हुए। लेकिन, पीजी के दाखिलों में स्थिति बिलकुल उल्टी है।
एलयू में पीजी के दाखिले स्नातक की मेरिट के आधार पर होते हैं। पीजी के दाखिलों की संख्या इस बात को साफ दिखाती है कि स्नातक में छात्राओं की संख्या भले ही कम हो, लेकिन पीजी की मेरिट में बेहतर स्थान पाकर दाखिला पा रही हैं।
इस संबंध में विवि के प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा कहते हैं कि स्नातक स्तर पर छात्राएं प्रोफेशनल कोर्सेज जैसे बीबीए, क्लैट, इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि की तरफ बड़ी संख्या में जा रही हैं। इसीलिए उनकी संख्या बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे कोर्सेज में कुछ कम है।
जो प्रोफेशनल कोर्सेज में नहीं जा रहीं वे स्नातक के बाद एकेडमिक्स, रिसर्च आदि में कॅरिअर बनाने का प्रयास कर रही हैं, जिसके चलते पीजी में इनकी संख्या काफी अधिक है।
10 पॉपुलर सब्जेक्ट जिनमें छात्राएं रहीं आगे
कोर्स--छात्राएं--छात्र
एमए इंग्लिश--145 (83.82 फीसदी)--28 (16.18 फीसदी)
एमकॉम कॉमर्स--130 (81.25 फीसदी)--30 (18.75 फीसदी)
एमएससी जूलोजी--39 (78 फीसदी)--11 (22 फीसदी)
एमकॉम एप्लाइड इकोनॉमिक्स--120 (75 फीसदी)--40 (25 फीसदी)
एमएससी बॉटनी--37 (74 फीसदी)--13 (26 फीसदी)
एमए एमआईएच--68 (68.69 फीसदी)--31 (31.31 फीसदी)
एमएससी केमिस्ट्री--50 (62.5 फीसदी)--30 (37.5 फीसदी)
एमए इकोनॉमिक्स--74 (61.67 फीसदी)--46 (38.33 फीसदी)
मास्टर्स इन सोशल वर्क--55 (59.14 फीसदी)--38 (40.86 फीसदी)
एमए हिंदी--69 (57.5 फीसदी)--51 (42.5 फीसदी)
इस पर लविवि के कुलपति प्रो. एसबी निमसे का कहना है कि इस समय सभी शिक्षण संस्थानों में छात्राएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। हाईस्कूल से ही देखें तो छात्राएं अधिक अंक पाती हैं। इंजीनियरिंग के बात करें तो आईआईटी में भी छात्राओं की संख्या बढ़ रही है। पहले मैथेमेटिक्स में छात्राएं कम हुआ करती थीं, लेकिन आज एमएससी मैथेमेटिक्स में भी वह छात्रों के बराबर पहुंच चुकी हैं। छात्राएं अब सिर्फ डिग्री के लिए नहीं बल्कि एक सुनहरे कॅरिअर के लिए गंभीरता से पढ़ाई कर रही हैं। उनको अपना लक्ष्य पहले से पता है जिसके तहत वह प्रवेश ले रही हैं।