करोड़ों रुपये से बने चार इंटर कॉलेज, दाखिले हुए सिर्फ 40
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मगर आलम यह है कि तीन कॉलेजों में न तो शिक्षकों की नियुक्ति हुई और न ही अन्य कोई संसाधन उपलब्ध कराए गए। तीनों इंटर कॉलेजों के भवन बनकर तैयार हैं। कक्षाएं, लैब आदि की भी ब्यवस्था है, लेकिन शिक्षक , फर्नीचर व अन्य संसाधन उपलब्ध न होने के चलते इस सत्र में इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू नहीं पाई।
केवल एक कॉलेज में जैसे-तैसे पढ़ाई शुरू कराई गई, वह भी इसलिए क्योंकि इसका उद्घाटन खुद उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में जिले में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज छोटी जुबली, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जियामऊ, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इंटर कॉलेज चिनहट और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बेहटा स्वीकृत किए गए थे।
छोटी जुबली के निर्माण के लिए चार करोड़ 74 लाख 28 हजार रुपये, जियामऊ के लिए चार करोड़ 68 लाख 28 हजार रुपये, चिनहट के लिए तीन करोड़ 73 लाख 67 हजार रुपये और बेहटा के लिए दो करोड़ 34 लाख 60 हजार रुपये स्वीकृत हुए। चारों कॉलेजों का निर्माण वर्ष 2015 में शुरू हुआ और मई 2017 में खत्म होना था।
न शिक्षक न फर्नीचर
जिन तीनों कॉलेजों में ताला लगा हुआ है उनमें न तो फर्नीचर हैं और न ही शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं। यही वजह है कि वर्तमान सत्र में इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। विभाग ने पहले अप्रैल माह और बाद में जुलाई से पढ़ाई शुरू कराने का दावा किया था।
चारों कॉलेजों में बच्चों के लिए बेहतर व्यवस्था की गई हैं। सभी कक्षाओं में टाइल्स, ग्रीन बोर्ड, एलईडी लाइट के अलावा अग्निशमन यंत्र, लैब, शौचालय, हॉल आदि सुविधाएं हैं। इनमें कक्षा छह से पढ़ाई शुरू होनी थी।
उधार के फर्नीचर से शुरू कराया कॉलेज
पद सृजित न होने से परेशानी
तीन कॉलेजों के शिक्षकों के पद सृजन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। पद सृजित न होने के चलते कॉलेजों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि कार्यदायी संस्था से कॉलेजों का हैंडओवर हो चुका है। - डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस