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लखनऊ यूनिवर्सिटीः पीएचडी की 107 और सीटों पर होंगे प्रवेश, दूसरे चरण के लिए सूची जारी
Fri, 29 Mar 2019 01:49 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 29 Mar 2019 01:49 AM IST
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लखनऊ यूनिवर्सिटी
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ विश्वविद्यालय में पहले चरण में पीएचडी में 451 विद्यार्थियों के दाखिले के बाद दूसरे चरण में 107 और सीटों पर प्रवेश होगा। विवि ने बृहस्पतिवार को इसके लिए प्रोविजनली चयनित विद्यार्थियों की सूची जारी की। साथ ही प्रवेश शुल्क भी जमा करना शुरू कर दिया।
यह तीन अप्रैल तक जमा किया जा सकेगा। अभ्यर्थी पांच अप्रैल से विभागों में जाकर प्रवेश सुनिश्चित कराएंगे। विवि में लंबी जद्दोजहद के बाद पीएचडी की 509 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें चयनित विद्यार्थियों को ऑनलाइन फीस जमा करने का अवसर दिया गया।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी सूची के अनुसार 451 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश सुनिश्चित कराया। माना जा रहा है कि पीएचडी प्रवेश को लेकर हुई देरी व विवि प्रशासन-शिक्षकों के बीच खींचतान के कारण काफी विद्यार्थियों ने दूसरे विश्वविद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करा लिया है। इस वजह से सीटें खाली रह गईं।
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यह तीन अप्रैल तक जमा किया जा सकेगा। अभ्यर्थी पांच अप्रैल से विभागों में जाकर प्रवेश सुनिश्चित कराएंगे। विवि में लंबी जद्दोजहद के बाद पीएचडी की 509 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें चयनित विद्यार्थियों को ऑनलाइन फीस जमा करने का अवसर दिया गया।
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विश्वविद्यालय की ओर से जारी सूची के अनुसार 451 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश सुनिश्चित कराया। माना जा रहा है कि पीएचडी प्रवेश को लेकर हुई देरी व विवि प्रशासन-शिक्षकों के बीच खींचतान के कारण काफी विद्यार्थियों ने दूसरे विश्वविद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करा लिया है। इस वजह से सीटें खाली रह गईं।
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30 तक कराएं कैटगरी वेरिफिकेशन
डेमो
इस क्रम में विश्वविद्यालय ने पहले की बची 58 व बढ़ी 49 समेत कुल 107 और सीटों पर प्रवेश करने का निर्णय लिया है। प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा ने बताया कि दूसरी प्रोविजनल लिस्ट के अभ्यर्थी 28 मार्च से 3 अप्रैल तक ऑनलाइन विवि की वेबसाइट पर फीस जमा कर सकेंगे। इसे 3 अप्रैल को शाम 6 बजे तक जमा करना होगा। वहीं, अगर अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन लॉगिन का पासवर्ड भूल गए हैं, तो इसे रीसेट कर सकते हैं।
पूरी तरह से फीस जमा होने के बाद अभ्यर्थी एलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ 5 अप्रैल को संबंधित विभाग में संपर्क कर प्रवेश करा सकेंगे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से पहले चरण की 509 सीटों के बाद 62 और सीटें बढ़ाने का निर्णय लिया है। किंतु कुछ विभागों में एससी-एसटी अभ्यर्थी न होने से 49 सीटों पर ही प्रवेश होगा। इसके साथ कुल 558 सीटों पर प्रवेश होगा।
प्रो. मिश्रा ने बताया कि दूसरी सूची में प्रोविजनली चयनित ओबीसी व एससी-एसटी अभ्यर्थी, जिन्होंने इंटरव्यू के समय अपना कैटगरी वेरिफिकेशन नहीं कराया है, 30 मार्च को दोपहर 3 बजे तक केमेस्ट्री विभाग में इसे सुनिश्चित कराएं। ऐसा न कराने पर वे फीस नहीं जमा कर सकेंगे।
सीटें बढ़ने का नहीं मिल पाया लाभ
लविवि प्रशासन ने पीएचडी सीटों को लेकर इतनी खींचतान और देरी की कि इसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल सका। विवि ने जद्दोजहद व शिक्षकों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सीटें निर्धारित कीं, लेकिन वह भी 509। फिर शिक्षक संघ ने इस पर विरोध दर्ज कराया तो तीन साल में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को को-सुपरवाइजर के साथ सीटें देने का निर्णय लिया। इसके अनुसार 62 सीटें और बढ़नी थीं। किंतु कुछ विभागों में एससी-एसटी अभ्यर्थी न होने के कारण इन सभी सीटों पर प्रवेश नहीं होगा।
पूरी तरह से फीस जमा होने के बाद अभ्यर्थी एलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ 5 अप्रैल को संबंधित विभाग में संपर्क कर प्रवेश करा सकेंगे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से पहले चरण की 509 सीटों के बाद 62 और सीटें बढ़ाने का निर्णय लिया है। किंतु कुछ विभागों में एससी-एसटी अभ्यर्थी न होने से 49 सीटों पर ही प्रवेश होगा। इसके साथ कुल 558 सीटों पर प्रवेश होगा।
प्रो. मिश्रा ने बताया कि दूसरी सूची में प्रोविजनली चयनित ओबीसी व एससी-एसटी अभ्यर्थी, जिन्होंने इंटरव्यू के समय अपना कैटगरी वेरिफिकेशन नहीं कराया है, 30 मार्च को दोपहर 3 बजे तक केमेस्ट्री विभाग में इसे सुनिश्चित कराएं। ऐसा न कराने पर वे फीस नहीं जमा कर सकेंगे।
सीटें बढ़ने का नहीं मिल पाया लाभ
लविवि प्रशासन ने पीएचडी सीटों को लेकर इतनी खींचतान और देरी की कि इसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल सका। विवि ने जद्दोजहद व शिक्षकों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सीटें निर्धारित कीं, लेकिन वह भी 509। फिर शिक्षक संघ ने इस पर विरोध दर्ज कराया तो तीन साल में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को को-सुपरवाइजर के साथ सीटें देने का निर्णय लिया। इसके अनुसार 62 सीटें और बढ़नी थीं। किंतु कुछ विभागों में एससी-एसटी अभ्यर्थी न होने के कारण इन सभी सीटों पर प्रवेश नहीं होगा।