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लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीएचडी नियमों में दी ढील, बढ़ सकती हैं लगभग 50 सीटें

Mon, 18 Mar 2019 01:13 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 18 Mar 2019 01:13 AM IST
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50 PHD seats may increase in Lucknow University
lucknow university - फोटो : amar ujala

लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएचडी सीट निर्धारण को लेकर खींचतान अभी भी जारी है। शिक्षकों के विरोध के बाद लविवि प्रशासन नियमों में थोड़ी और ढील देने को तैयार हो गया है। इसके बाद पीएचडी की कम से कम 50 और सीट बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब अगले तीन साल में सेवानिवृत्त होने जा रहे शिक्षकों को भी सीटें आवंटित की जाएंगी।

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इतना ही नहीं जन्म तिथि के आधार पर जिन शिक्षकों को अगले साल पीएचडी सीट आवंटित नहीं होनी है, इस साल उनके लिए अनुमन्य सभी सीटें आवंटित कर दी जाएंगी। यूजीसी के निर्देश के अनुसार नवनियुक्त प्रोफेसर एक समय में अधिकतम आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार शोधार्थियों के गाइड बन सकते हैं।
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नये सर्कुलर के अनुसार नवनियुक्त प्रोफेसर को पहले और दूसरे साल तीन और तीसरे साल दो सीटें आवंटित की जानी थीं। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर को तीनों साल दो-दो और असिस्टेंट प्रोफेसर को पहले साल दो और अगले दो साल में एक-एक सीट आवंटित होनी थीं।इसके अलावा जब तक पीएचडी थीसिस जमा नहीं हो जाती, सीट खाली नहीं मानी जाएगी।
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लविवि में प्रवेश परीक्षा के बाद सीट निर्धारण के लिए जारी सर्कुलर से शिक्षकों में काफी रोष था। लखनऊ विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (लूटा) ने इसके विरोध में कुलपति को ज्ञापन और धरना देकर अपना विरोध जाहिर किया था। इस सर्कुलर के हिसाब से नवनियुक्त शिक्षकों को उनके लिए निर्धारित अधिकतम सीट में से सिर्फ एक तिहाई ही इस साल आवंटित होनी थीं। अगले तीन साल में सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षक को एक भी सीट आवंटित नहीं होने संबंधी नियम पर शिक्षकों में काफी नाराजगी थी। विवि द्वारा छूट दिये जाने के बाद शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने संतोष जाहिर किया है।

विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा

सह-पर्यवेक्षक आवंटित करने पर पेच
लविवि द्वारा जारी नये पत्र में कहा गया है कि जो शिक्षक तीन साल की अवधि से पहले सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं उन्हें शोधार्थी आवंटन करने के लिए सह-पर्यवेक्षक का नाम देना है। जबकि लविवि का पीएचडी अध्यादेश एक विभाग में सह-पर्यवेक्षक आवंटित करने की मनाही करता है। इस लिहाज से अगर सह-पर्यवेक्षक का नाम दिया गया तो अध्यादेश की अवमानना होनी तय है।

19 तक दें छह माह में शोधकार्य पूरा होने की रिपोर्ट
लविवि प्रशासन ने सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को एक मौका और दिया है। इसके अनुसार उनके निर्देशन में अगर अगले छह महीने में किसी विद्यार्थी का शोधकार्य पूरा होने वाला है तो वे इसकी सूचना 19 मार्च तक दे सकते हैं। इसके बाद शोधार्थी आवंटन के लिए वह सीट खाली मान ली जाएगी।

श्रेणी सत्यापन न होने की वजह से बदल रही मेरिट सूची
लविवि ने पीएचडी का रिजल्ट जारी करके फीस जमा कराने की शुरुआत कर दी है, लेकिन इससे पहले विभिन्न वर्गों और आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों का सत्यापन नहीं कराया। सत्यापन के बाद बहुत से अभ्यर्थी ऐसे हैं जो दावे के बावजूद आरक्षण का लाभ लेने के लिए प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं करा सके। इसलिए उन्हें आरक्षण या उस श्रेणी का लाभ नहीं मिला। इस वजह से उन्हें सामान्य अभ्यर्थी माना गया। ऐसे अभ्यर्थियों की वजह से मेरिट सूची बदल रही है। लविवि द्वारा इसका ध्यान नहीं रखा गया है। इससे अभ्यर्थियों को परेशान होना पड़ रहा है।

लविवि प्रशासन ने शिक्षक संघ की मांग के तीन साल में सेवानिवृत्त होने संबंधी नियम को साफ कर दिया है। इसके बाद अब पीएचडी की सीटों में और इजाफा होगा। विद्यार्थियों को इसका फायदा मिलेगा। - डॉ. विनीत वर्मा, महामंत्री, लूटा
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