लखनऊ यूनिवर्सिटीः 11 कॉलेजों के 13 कोर्सेज में दाखिले पर रोक, यहां देखें- पूरी डिटेल
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लखनऊ विश्वविद्यालय ने 11 कॉलेजों के 13 पाठ्यक्रमों में इस साल से दाखिले पर रोक लगा दी है। इन कॉलेजों ने अस्थायी सहयुक्तता की अवधि समाप्त होने के बावजूद न तो स्थायी कराई और ना ही इसके विस्तारण के लिए आवेदन ही किया।
इसको देखते हुए लविवि ने कॉलेजों को इन कोर्सेज में दाखिले लेने से मना कर दिया है। अगर कॉलेज इन पाठ्यक्रमों में दाखिले ले भी लेंगे तो लविवि उनकी परीक्षा नहीं कराएगा। कुलसचिव एसके शुक्ला ने इसका आदेश बुधवार को जारी कर दिया। यह आदेश पिछले सत्रों में लिए गए दाखिलों पर लागू नहीं होगा।
लविवि में स्ववित्तपोषित योजना के तहत कॉलेेजों को तीन साल के लिए मान्यता देने का नियम है। तीन साल के बाद मान्यता स्थायी करानी होती है। इसमें एक साल की छूट दी जा सकती है। अगर कॉलेज चौथे साल भी मान्यता स्थायी नहीं करा पाता है तो उस पर हर साल एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।
यह जुर्माना अधिकतम तीन लाख रुपये हो सकता है। मतलब चार साल के बाद अगले तीन साल तक जुर्माना अदा करके कॉलेज दाखिले ले सकते हैं। सात साल की अवधि के बाद किसी भी सूरत में दाखिला लेना संभव नहीं है और कोर्स की मान्यता अपने आप समाप्त समझी जाती है।
छह बार जारी हुआ नोटिस
विवि ने इस साल मान्यता स्थायीकरण या फिर विस्तारण के लिए अंतिम तारीख 30 जून तय की थी। 11 कॉलेज ऐसे थे जिन्होंने अस्थायी मान्यता समाप्त होने के बावजूद स्थायी सहयुक्तता नहीं ली। ऐसे में इन पाठ्यक्रमों में दाखिले पर रोक लगा दी गई है।
इन पाठ्यक्रमों में करीब 800 सीटें हैं। हालांकि द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों पर इसका कोई असर नहीं होगा। उनकी परीक्षा लविवि पहले की तरह कराएगा।
लविवि ने इन कॉलेजों के दाखिले पर रोक का पत्र भले ही 17 जुलाई को जारी किया है, लेकिन इसकी चेतावनी इन्हें बराबर दी जा रही थी। मान्यता स्थायीकरण के लिए इस साल पहला नोटिस 22 जनवरी को जारी किया गया गया था। दूसरा नोटिस 15 फरवरी, तीसरा 7 मार्च, चौथा 8 मई, पांचवां 20 मई और छठा तथा अंतिम नोटिस सात जून को जारी किया गया था। इसके बावजूद ये कॉलेज स्थायी मान्यता लेने में असफल रहे।
देखें- इन कॉलेजों के पाठ्यक्रमों पर लगाई रोक
दाखिले लिए तो खुद उत्तरदायी होंगे कॉलेज
जिन कॉलेजों ने निर्धारित अवधि में अपनी मान्यता विस्तारित नहीं कराई है उनके दाखिलों पर रोक लगा दी है। इन कॉलेजों को पहले ही नोटिस जारी किया गया था। अगर इन कॉलेजों ने दाखिले लिए तो इसके लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगे। लविवि उनकी परीक्षा नहीं कराएगा। - प्रो. एसपी सिंह,कुलपति, लविवि