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टीकरी बॉर्डर - बहादुरगढ़ में दो आंदोलनकारी किसानों की मौत

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 05:45 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के टीकरी बॉर्डर - बहादुरगढ़ में पड़ाव में मंगलवार रात दो किसानों की मौत हो गई। मृतकों में एक किसान हरियाणा से और दूसरा पंजाब से था। मंगलवार दोपहर बाद टीकरी बॉर्डर पर जहरीला पदार्थ निगल लेने वाले रोहतक जिले के गांव पाकस्मा के करीब 42 वर्षीय किसान जयभगवान राणा की जान अस्पताल में इलाज के बावजूद बच नहीं पाई। उन्होंने दिल्ली की सीमा में किसानों की सभा के मंच के निकट जहर खा लिया था। उन्हें दिल्ली के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। लेकिन मंगलवार देर रात उनकी मौत हो गई। बहादुरगढ़ पुलिस की टीकरी बॉर्डर चौकी के एक दरोगा ने बताया कि जय भगवान राणा की मौत होने की जानकारी मिली है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्यवाही दिल्ली के मुंडका थाना की पुलिस कर रही है। शव का पोस्टमार्टम संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में ही होगा।
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बहादुरगढ़ बाईपास पर नयागांव चौक के निकट ठहरे पंजाब के 65 वर्षीय किसान धन्ना सिंह की मंगलवार देर रात हृदयाघात से मौत हो गई। उनके शव को नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ के शव गृह में रखा गया है। परिजनों को सूचना भेज दी गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि धन्ना सिंह एक महीने से यहां आंदोलन में थे। मंगलवार रात को वह भोजन करके आराम से सोए। बाकी दिनों वह हर सुबह जल्दी जाग जाते थे। लेकिन बुधवार सुबह नहीं उठे तो करीब सात बजे साथी किसानों ने आवाज लगाई। बार बार आवाज लगाने पर भी कोई रेस्पॉन्स नहीं मिला तो उनको हिलाकर जगाने की कोशिश की गई। ध्यान से देखा गया। लेकिन इसके बावजूद उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो उन्हें तुरंत नागरिक अस्पताल ले जाया गया। सीएमओ झज्जर डॉ. संजय दहिया ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने जांच की तो मृत पाया गया। धन्ना सिंह पंजाब के जिला पटियाला की तहसील नाभा के गांव तंगू के निवासी थे।
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जहरीला पदार्थ खाने से पहले जय भगवान राणा ने देशवासियों के नाम लिखे पत्र में कहा था कि किसानों की कोई सुनवाई नहीं कर रहा। राणा ने सरकार को इस समस्या का समाधान भी बताया था। पत्र में उन्होंने कहा है कि हरेक राज्य के दो दो किसान नेताओं को बुलाकर सरकार मीडिया की उपस्थिति में बात करे। अगर ज्यादा राज्यों के प्रतिनिधि कानूनों के खिलाफ हों तो कानूनों को रद्द कर दिया जाए, अन्यथा किसान अपने घर चले जाएं।
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