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भारत के चार अनोखे द्वीप जहां पहुंचकर होगा जन्नत जैसा एहसास
Sat, 17 Aug 2019 05:03 PM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Sat, 17 Aug 2019 05:03 PM IST
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साल में खुद के लिए एक ट्रिप तो बनती है। व्यस्त जिंदगी में अगर आपको इतना समय भी नहीं मिला कि आप कुछ तय कर सकें तो कोई बात नहीं। आज हम आपको एक ऐसी जगह के विषय में बताने जा रहे हैं जहां नीले आसमान के नीचे समुद्र भी है, मस्त मौसम भी है और मन शांत करने के लिए प्रकृति की खूबसूरती और सफेद रेत के बीच भी हैं।
खंदेरी और उंदेरी द्वीप
16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों ने महाराष्ट्र के अलीबाग जिले से 7 किमी दूर थाल में खंदेरी और मुंबई बंदरगाह की ओर प्रॉंग लाइटहाउस के पास द्वीपों पर किले बनवाए थे। जो समय के साथ पुराने हो गए हैं। इन किलों ने ब्रिटिश और मराठा शासन का राज भी देखा है, इतिहास प्रेमी इन किलों में घूमते देखे जा सकते हैं।
16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों ने महाराष्ट्र के अलीबाग जिले से 7 किमी दूर थाल में खंदेरी और मुंबई बंदरगाह की ओर प्रॉंग लाइटहाउस के पास द्वीपों पर किले बनवाए थे। जो समय के साथ पुराने हो गए हैं। इन किलों ने ब्रिटिश और मराठा शासन का राज भी देखा है, इतिहास प्रेमी इन किलों में घूमते देखे जा सकते हैं।
हैवलॉक द्वीप
ग्रेटर अंडमान से थोड़ा आगे जाएंगे तो सफेद रेत से सजी इस जन्नत का नजारा देखेंगे। पोर्ट ब्लेयर से 39 किमी दूर स्थित पानी पर तैरती मूंगे की चट्टानों पर बने इस खूबसूरत द्वीप तक नाव से पहुंचा जा सकता है और द्वीप की तटरेखा के अंदर एक खूबसूरत जंगल भी है।
ग्रेटर अंडमान से थोड़ा आगे जाएंगे तो सफेद रेत से सजी इस जन्नत का नजारा देखेंगे। पोर्ट ब्लेयर से 39 किमी दूर स्थित पानी पर तैरती मूंगे की चट्टानों पर बने इस खूबसूरत द्वीप तक नाव से पहुंचा जा सकता है और द्वीप की तटरेखा के अंदर एक खूबसूरत जंगल भी है।
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नेत्रानी द्वीप
कर्नाटक तट से थोड़ी ही दूर स्थित इस द्वीप के आस पास के पानी में व्हेल, शार्क, कछुए, कोबिया, स्टिंग रे, स्टोनफिश जैसे जलीय जीव पाए जाते हैं। साथ ही, स्कूबा डाईविंग (यहां सबसे ज्यादा गहराई 18 मीटर की है, जहां तक जाने के लिए एडवांस स्तर के सर्टिफिकेट की जरूरत होती है) करने के लिए आपको लक्षद्वीप जाने की कोई जरूरत नहीं है। मुरुदेश्वर से नेत्रानी द्वीप नाव द्वारा पहुंचा जा सकता है।
कर्नाटक तट से थोड़ी ही दूर स्थित इस द्वीप के आस पास के पानी में व्हेल, शार्क, कछुए, कोबिया, स्टिंग रे, स्टोनफिश जैसे जलीय जीव पाए जाते हैं। साथ ही, स्कूबा डाईविंग (यहां सबसे ज्यादा गहराई 18 मीटर की है, जहां तक जाने के लिए एडवांस स्तर के सर्टिफिकेट की जरूरत होती है) करने के लिए आपको लक्षद्वीप जाने की कोई जरूरत नहीं है। मुरुदेश्वर से नेत्रानी द्वीप नाव द्वारा पहुंचा जा सकता है।
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माजुली द्वीप
अगर आपको सुंदर दृश्य देखने, मनोरम सूर्यास्त का अनुभव, शानदार तस्वीरें लेने का शौक है तो असम में ब्रह्मपुत्र और खेरकुटिया नदियों के बीच बने दुनिया की सबसे बड़े नदी में स्थित माजुली द्वीप पर पहुंच जाइए। ये द्वीप अपने त्यौहारों और प्रार्थनाओं के कारण 16वीं शताब्दी के असामी सभ्यता का जनक माना जाता है। यहां 22 वैष्णव सत्र मौजूद हैं जिससे आप नई वैष्णवी विचारधारा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अगर आपको सुंदर दृश्य देखने, मनोरम सूर्यास्त का अनुभव, शानदार तस्वीरें लेने का शौक है तो असम में ब्रह्मपुत्र और खेरकुटिया नदियों के बीच बने दुनिया की सबसे बड़े नदी में स्थित माजुली द्वीप पर पहुंच जाइए। ये द्वीप अपने त्यौहारों और प्रार्थनाओं के कारण 16वीं शताब्दी के असामी सभ्यता का जनक माना जाता है। यहां 22 वैष्णव सत्र मौजूद हैं जिससे आप नई वैष्णवी विचारधारा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।