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सपनों की दुनिया है 'बाली', मौका मिले तो जरूर घूम कर आएं

Wed, 29 Aug 2018 09:40 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 29 Aug 2018 09:40 AM IST
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if you get an opportunity to visit Bali Indonesia you must go there
bali indonesia
यूं तो मैं काम के सिलसिले में कई देशों और बहुत से शहरों में गया हूं, मगर मुझे जब भी खाली समय मिलता है, तो मैं इंडोनेशिया जरूर घूमने जाता हूं। मुझे यहां के द्वीपों पर जाना और घूमना काफी पसंद है। इंडोनेशिया का बाली द्वीप मेरी पसंदीदा जगह है। यह एशिया के सबसे खूबसूरत द्वीपों में से एक है और हर साल यहां पूरी दुनिया से लाखों सैलानी घूमने के लिए आते हैं।
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बाली जावा के पूर्व में स्थित है। यहां की राजधानी देनपसार है। यह द्वीप कला और संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। हालांकि इंडोनेशिया एक मुस्लिम बहुल देश है, बावजूद इसके करीब 38 लाख जनसंख्या वाला बाली द्वीप की ज्यादातर आबादी हिंदू है। इन लोगों का लिबास स्थानीय ही है, लेकिन इनके नाम संस्कृत शब्दों पर आधारित हैं, जैसे- कर्ण, इरावती आदि। यहां बहुत-सी हिंदू महिलाएं माथे पर तिलक भी लगाती हैं, जिससे वे खुद को अलग दिखा सकें। बाली द्वीप पर अनेक हिंदू मंदिर हैं। इसके अलावा हर घर या होटल में किसी स्थान पर छोटा-सा मंदिर स्थापित किया हुआ जरूर मिलेगा, जहां ये लोग अपनी विधि से रोज पूजा करते हैं। यहां फैला नीला समंदर और प्राचीन मंदिर मुझे बार-बार यहां आने के लिए उकसाते रहते हैं।
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बाली का नुसा दुआ एक बहुत ही खूबसूरत शहर है। पूरे शहर में हरे-भरे पार्क, हिंदू पुराणों के चरित्रों और नृत्य करती महिलाओं की मूर्तियां और विभिन्न उष्णकटिबंधीय पशु-पक्षी विचरण करते नजर आएंगे। धार्मिक त्योहारों के दौरान बाली के लोग मूर्तियों को कपड़े पहनाते हैं और मंदिरों में मूर्तियों के ऊपर छाते भी लगाए जाते हैं। यहां के लोग मृदुभाषी, मित्रतापूर्ण और धार्मिक हैं।
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बाली को प्राचीन मंदिरों के लिए ‘सहस्त्र मंदिरों का द्वीप’ भी कहा जाता है। नीले समंदर के किनारे पर स्थित उलुवतु मंदिर पर्यटकों को आकर्षित करता है। वहां के लोगों के मुताबिक, 11वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर बाली के उन नौ दिशात्मक मंदिरों में से एक है, जिन्हें बाली को बुरी आत्माओं से बचाने के लिए बनाया गया था। वैसे यहां मंदिर में जाने से पहले कमर पर एक विशेष कपड़ा बांधने की रीति है। मंदिर परिसर में एक खुले रंगमंच जैसी संरचना भी है, जहां शाम को हिंदू पौराणिक नाटकों का मंचन होता है। फिलहाल मैं सोनी सब पर शुरू हुए धारावाहिक ‘अलादीन नाम तो सुना ही होगा’ में व्यस्त हूं, लेकिन जल्द ही बाली की सैर पर दोबारा जाना चाहूंगा।     
 -शान मोहम्मद से बातचीत पर आधारित
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