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ओशो: मनुष्य एक रोग है, जिसके दो इलाज हैं

लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला Updated Tue, 11 Dec 2018 02:01 PM IST
ओशो जन्मदिन विशेष
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तन और मन अलग-अलग खुश नहीं हो सकते, न अलग-अलग दुखी हो सकते हैं। दोनों एक ही अस्तित्व के दो आयाम हैं, जिन्हें एक साथ संभाला और संवारा जाना जरूरी है। मनुष्य एक बीमारी है। यही उसकी तकलीफ है और यही उसकी खूबी भी। यही उसका सौभाग्य है और यही उसका दुर्भाग्य भी। रोग ने ही मनुष्य को सारा विकास दिया है। रोग का मतलब यह है कि हम जहां हैं, वहीं राजी नहीं हो सकते। हम जो हैं, वही होने से राजी नहीं हो सकते। रोग ही मनुष्य की गति बना। लेकिन, वही उसका दुर्भाग्य भी है, क्योंकि इसी रोग की वजह से वह बेचैन है, परेशान है, अशांत है, दुखी है, पीड़ित है। यह जो मनुष्य नाम का रोग है, इस रोग को सोचने, समझने और हल करने के दो उपाय किए गए हैं। 
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