फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Stress Management ›   Benefits And Effects Of Work Pressure And Office Tension

ऑफिस वाले काम की टेंशन दें, तो खुश हो जाइए क्योंकि...

Fri, 26 Jan 2018 10:00 AM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Fri, 26 Jan 2018 10:00 AM IST
विज्ञापन
Benefits And Effects Of Work Pressure And Office Tension
Office - फोटो : HRstandard

रफ्तार ही जिंदगी है। अगर कोई चीज जड़ है, तो मानो वो जिंदा नहीं मुर्दा है। इंसान की जिंदगी की बात करें, तो हर गुजरते पल के साथ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज होती जा रही है। इंसानों के पुरखे कभी गुफाओं में रहा करते थे। और आज आवाज से भी तेज रफ्तार हो गई है हमारी जिंदगी। 

विज्ञापन

दिलीप कुमार का वो किस्सा...

Benefits And Effects Of Work Pressure And Office Tension
Office

मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो यूरोप से कॉनकॉर्ड विमान से न्यूयॉर्क गए थे। कॉनकॉर्ड विमान आवाज से भी तेज रफ्तार से चलता था। इसे अस्सी के दशक में फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर बनाया था। तो, दिलीप साहब ये देखकर हैरान रह गए कि इतने तेज रफ्तार विमान से भी अपनी मंजिल पर पहुंचकर लोग भागते हुए एयरपोर्ट से निकल रहे थे। उनका मानना था कि आज की नस्ल भागमभाग वाली ही है। आराम से काम ही नहीं होता। 

खैर, दिलीप साहब के तजुर्बे से इतर आज रफ्तार ही तरक्की और कामयाबी का पैमाना है। फलां गाड़ी इतनी तेज चलती है। उसकी इंटरनेट की स्पीड इतनी ज्यादा है। वो काम बहुत तेज कर लेता है। कुल मिलाकर, 'स्पीड इज लाइफ'। बीते कुछ दशकों में दुनिया ने काफी तरक्की कर ली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है। रोजगार के नए मौके सामने आए हैं। लोगों की जिंदगी में तेजी आई है। तेजी से आगे बढ़ती तकनीक ने इसमें बहुत अहम किरदार निभाया है। दिलीप कुमार जैसे बहुत से लोगों को इस तेज रफ्तार जिंदगी से शिकायतें हैं। उनके मुताबिक आज लोग एक दूसरे से दूर हो गए हैं। अपने काम की डेडलाइन पूरा करने के लिए सब सिर्फ दौड़ रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

कंपनियों ने छीना सुकून

Benefits And Effects Of Work Pressure And Office Tension
office logo

मल्टीनेशनल कंपनियों ने तो इंसान से उसका सुकून ही छीन लिया है। हालांकि ये कंपनियां अपने कर्मचारियों को बहुत सी सहूलियतें देती हैं लेकिन उसके बदले में कीमत भी उसी तरह वसूलती हैं। दिन शुरू होने के साथ ही खत्म हो जाता है, लेकिन हमारा काम खत्म नहीं होता। काम का प्रेशर लोगों की जिंदगी में तनाव बढ़ा रहा है। आज ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों की शिकायत है कि उन्हें अपनी मर्जी का काम करने का मौका नहीं मिलता। 

गैजेट्स ने बिगाड़ा पूरा खेल
रोजगार की दौड़ में भागते-भागते उनके शौक पीछे छूटते जा रहे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक 94 फीसद लोग मानते हैं कि उन्हें अपने सभी काम वक्त पर करने के लिए समय नहीं मिल पाता। घर पर रहते हुए भी ऑफिस का तनाव बना रहता है। लगातार मिलने वाले इस तनाव की जड़ है ऑफिस ई-मेल। गैजेट्स ने हमारी जिंदगी को ऐसे जकड़ा है कि निजात नहीं मिलती। अमरीका में किए गए एक सर्वे के मुताबिक आधे से ज्यादा ऐसे लोग हैं जो अपनी छुट्टियां भी बेफिक्र होकर नहीं गुजार पाते। वो इसी तनाव में रहते हैं कि चंद दिनों की छुट्टी के बाद जब ऑफिस जाएंगे तो काम का पुलिंदा उनका इंतजार कर रहा होगा। कहा जाता है कि जो लोग ऑफिस में ज्यादा समय बिताते हैं उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा होता है।

विज्ञापन

मेल चेक नहीं करने वाले कर्मी ज्यादा प्रॉडक्टिव

Benefits And Effects Of Work Pressure And Office Tension
Office

बहुत से जानकारों का कहना है कि काम का ये तनाव हमारी रचनात्मक क्षमता यानी क्रिएटिव सोच को खत्म कर रहा है। रचनात्मक सोच के लिए दिमागी सुकून बहुत जरूरी है। आज इस दौड़ती भागती जिंदगी में सुकून की ही सबसे ज्यादा कमी है। कोई भी इंसान एक वक्त में एक ही काम कर सकता है। लेकिन काम की मार ऐसी है कि हम एक साथ कई कामों में उलझे रहते हैं।

जैसे, आप किसी काम में ध्यान लगाकर उसे पूरा करने की कोशिश में हैं, लेकिन तभी कोई ई-मेल आ जाती है जिसका तुरंत जवाब देना है तो आपका अपने काम से फोकस हट जाता है। 2005 में की गई एक रिसर्च के मुताबिक हम बिना किसी बाधा के किसी काम में 11 मिनट ही फोकस कर सकते हैं। हाल ही में की गई एक और रिसर्च से पता चलता है कि जो कर्मचारी कम से कम मेल देखते हैं वो तनाव का शिकार कम होते हैं और उनका अपने काम पर ध्यान ज्यादा होता है। कुछ जानकार ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि मसरूफ जिंदगी के कुछ नकारात्मक पहलू जरूर हैं। 

वर्क लोड के फायदे भी होते हैं

Benefits And Effects Of Work Pressure And Office Tension
सोना

लेकिन इस नेगेटिविटी में पॉजिटिव बातें छिपी हैं। 1999 में हुए एक एक रिसर्च के मुताबिकजो लोग ज्यादा तनाव के माहौल में रहते हैं उनमें चुनौतियों को स्वीकार करने की क्षमता बढ़ जाती है। साथ ही वो ज़्यादा रचनात्मक तरीके से सोचने लगते हैं। तनाव का एक सकारात्मक पहलू ये भी है कि चुनौतियों को पूरा करने के बाद जिस खुशी का एहसास होता है वो बयान करना मुश्किल है।

क्या तनाव लेने के लिए तैयार हैं लोग?
बहुत से सर्वे जाहिर करते हैं कि लोग आज इस तरह का तनाव लेने के लिए तैयार हैं। नौजावनों में चुनौती कबूल करने का माद्दा ज्यादा होता है। ब्रिटेन में दस में से आठ कर्मचारी अपने काम से खुश हैं। पूरे यूरोप में 74 फीसद लोग अपने काम से मुतमईन हैं। अमरीका में ये आंकड़ा 88 फीसद का है। लंबे वक्त से ये आंकड़ा या तो यूं ही बना हुआ है या इसमें इजाफा हुआ है। लेकिन कमी कभी नहीं आई।

बदलते आर्थिक माहौल ने काम के रूप को भी बदला है। मसलन, अभी तक जो काम हाथ से होते थे, अब उनकी जगह मशीनों ने ले ली है। मशीनों के जरिए वो काम अब आसान हो गए हैं और खतरा कम हो गया है। काम की जगह पर जख्मी होने वाले मजदूरों की संख्या में काफी कमी आई है। हालांकि बहुत से लोगों का कहना है कि मशीनों के आ जाने से रोजगार कम हो जाएगा। लेकिन वो ये भूल जाते हैं नई तकनीक के साथ रोजगार के मौके बढ़ेंगे। समय बचेगा तो दूसरे कामों के लिए उसका इस्तेमाल हो सकेगा।

राहत के लिए क्या करें?

Benefits And Effects Of Work Pressure And Office Tension
office

इसमें कोई शक नहीं कि आज की मसरूफ जिंदगी तनाव देती है। लेकिन अगर आप चाहें तो छोटी-छोटी बातों पर अमल करके खुद को इस तनाव से दूर रख सकते हैं।

कुछ देर के लिए ई-मेल नोटिफिकेशन बंद कर दीजिए
अपने काम की जगह से चंद मिनटों के लिए उठ कर बाहर खुली हवा में टहल आइए। ऑफिस की बातों को दिल से ना लगाकर सिर्फ अपने काम पर ध्यान केंद्रित करके अपने ऑफिस, काम और मसरूफ जिंदगी का मजा लीजिए।




 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all update about bollywood news, fitness news, cricket news, Entertainment news in Hindi. Stay updated with us for all breaking hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed