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बात-बात पर एस्प्रिन लेते हैं तो हो सकता है यह खतरा
Updated Mon, 16 Jun 2014 03:00 PM IST
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डॉक्टरों को सलाह दी जा रही है कि वे मरीज़ों को एस्प्रिन के नियमित इस्तेमाल की सलाह ना दें, क्योंकि दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा बढ़ जाता है।
ब्रिटेन में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड क्लिनिकल एक्सलेंस (नाइस) ने अनियमित धड़कन यानी एट्रियल फिबरिलैशन (एएफ़) के मरीज़ों को अन्य दवाएं देने के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इन दिशा-निर्देशों के अनुसार एट्रियल फिबरिलैशन से जूझ रहे मरीज़ों को नियमित एस्प्रिन लेने की जगह दूसरी दवाइयों के सेवन की सलाह दी जाए।
नाइस द्वारा तैयार किए गए सलाहों के प्रारूप (ड्रॉफ्ट एडवाइस) में कहा गया है कि एट्रियल फिबरिलैशन के लिए ख़ून को पतला करने वाली (ब्लड-थिनिंग) वारफ़रीन या इससे मिलती जुलती कोई दवा ज़्यादा बेहतर होगी।
नाइस द्वारा तैयार किए गए प्रारूप को इसी महीने अंतिम रूप मिलने वाला है। इस सलाह का असर सैंकड़ों मरीज़ों की सेहत पर पड़ेगा।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश डॉक्टर पहले से ही अपने मरीज़ों को एस्प्रिन की जगह ब्लड थिनर लेने की सलाह दे रहे हैं।
एट्रियल फिबरिलैशन
एट्रियल फिबरिलैशन (एएफ़) दिल की धड़कन से जुड़ी बेहद आम बीमारी है। एक आकलन के अनुसार ब्रिटेन में 80000 लोग, मोटे तौर पर 100 में से एक व्यक्ति, इस बीमारी से ग्रस्त है।
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एएफ एक ऐसी अवस्था है जिसमें दिल उस तरीक़े से काम नहीं कर पाता जिस तरीक़े से उसे करना चाहिए। इसी वजह से ख़ून का थक्का बनने की संभावना पैदा हो जाती है। और अंततः दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है।
बरसों से दिल के दौरे से परेशान मरीज़ एस्प्रिन लेते रहे हैं। लेकिन बढ़ते मामलों से पता चलता है कि दूसरे इलाजों के मुक़ाबले इस दवा का असर काफ़ी कम है।
इंग्लैंड और वेल्स के लिए जारी किए गए नाइस के दिशा-निर्देशों के अनुसार हालांकि इन सबके बावजूद कुछ मरीज़ों के लिए एस्प्रिन का नियमित सेवन भले फायदेमंद हो, अधिकांश मरीज़ों को दूसरी दवाओं के सेवन की सलाह दी जानी चाहिए।
नाइस के सलाहों के प्रारूप के अनुसार, वारफरीन या नया ओरल ऐन्टेकोऐग्यलन्ट (मुंह से खाने वाला स्कंदनरोधी) अक्सर ज्यादा असरदार होता है।
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ब्रिटेन में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड क्लिनिकल एक्सलेंस (नाइस) ने अनियमित धड़कन यानी एट्रियल फिबरिलैशन (एएफ़) के मरीज़ों को अन्य दवाएं देने के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इन दिशा-निर्देशों के अनुसार एट्रियल फिबरिलैशन से जूझ रहे मरीज़ों को नियमित एस्प्रिन लेने की जगह दूसरी दवाइयों के सेवन की सलाह दी जाए।
नाइस द्वारा तैयार किए गए सलाहों के प्रारूप (ड्रॉफ्ट एडवाइस) में कहा गया है कि एट्रियल फिबरिलैशन के लिए ख़ून को पतला करने वाली (ब्लड-थिनिंग) वारफ़रीन या इससे मिलती जुलती कोई दवा ज़्यादा बेहतर होगी।
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नाइस द्वारा तैयार किए गए प्रारूप को इसी महीने अंतिम रूप मिलने वाला है। इस सलाह का असर सैंकड़ों मरीज़ों की सेहत पर पड़ेगा।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश डॉक्टर पहले से ही अपने मरीज़ों को एस्प्रिन की जगह ब्लड थिनर लेने की सलाह दे रहे हैं।
एट्रियल फिबरिलैशन
एट्रियल फिबरिलैशन (एएफ़) दिल की धड़कन से जुड़ी बेहद आम बीमारी है। एक आकलन के अनुसार ब्रिटेन में 80000 लोग, मोटे तौर पर 100 में से एक व्यक्ति, इस बीमारी से ग्रस्त है।
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एएफ एक ऐसी अवस्था है जिसमें दिल उस तरीक़े से काम नहीं कर पाता जिस तरीक़े से उसे करना चाहिए। इसी वजह से ख़ून का थक्का बनने की संभावना पैदा हो जाती है। और अंततः दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है।
बरसों से दिल के दौरे से परेशान मरीज़ एस्प्रिन लेते रहे हैं। लेकिन बढ़ते मामलों से पता चलता है कि दूसरे इलाजों के मुक़ाबले इस दवा का असर काफ़ी कम है।
इंग्लैंड और वेल्स के लिए जारी किए गए नाइस के दिशा-निर्देशों के अनुसार हालांकि इन सबके बावजूद कुछ मरीज़ों के लिए एस्प्रिन का नियमित सेवन भले फायदेमंद हो, अधिकांश मरीज़ों को दूसरी दवाओं के सेवन की सलाह दी जानी चाहिए।
नाइस के सलाहों के प्रारूप के अनुसार, वारफरीन या नया ओरल ऐन्टेकोऐग्यलन्ट (मुंह से खाने वाला स्कंदनरोधी) अक्सर ज्यादा असरदार होता है।