National Dengue Day 2025: मानसून के दिनों में कई प्रकार की मच्छरजनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। डेंगू-मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारण अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल अकेले डेंगू के कारण 30-40 करोड़ लोगों की सेहत पर प्रभावित होती है, वहीं हजारों लोगों की इससे मौत हो जाती है।
National Dengue Day: डेंगू का किन अंगों पर होता है सबसे ज्यादा असर? गंभीर स्थितियों में होती हैं ये दिक्कतें
जून से लेकर सितंबर-अक्तूबर तक भारत में डेंगू के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते हैं। डॉक्टर्स कहते हैं, डेंगू की स्थिति शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है, क्या आपको इसकी जानकारी है?
पहले डेंगू के बारे में जान लीजिए
डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू वायरस शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करता है, जिससे जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
डेंगू के कारण इंटरनल ब्लीडिंग (आंतरिक रक्तस्राव) के खतरे के बारे में आपने भी जरूर सुना-पढ़ा होगा। डॉक्टर बताते हैं, डेंगू के 60-70% मरीजों में प्लेटलेट्स 50,000/μL से कम देखी जाती है। गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स 10,000/μL से भी नीचे जा सकती है। प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति ही रक्तस्राव का कारण बनती है।
डेंगू का अगर समय पर इलाज न हो पाए तो इससे कई अंगों की समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
लिवर और किडनी पर असर
डेंगू की समस्या लिवर को प्रभावित करने लगती है, जिसमें हेपेटाइटिस जैसा लक्षण दिख सकता है। डेंगू की गंभीर स्थिति में लिवर कोशिकाएं सूज जाती हैं और इसकी कार्यक्षमता घट जाती है।
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च 2018 की रिपोर्ट में पाया गया कि डेंगू के 75% मामलों में लिवर एंजाइम्स असामान्य हो जाते हैं, जिसके कारण कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। इसी तरह डेंगू के कारण पेशाब में कमी, यूरिया और क्रिएटिनिन स्तर में वृद्धि का भी कारण बन सकता है। कुछ लोगों में इसके कारण एक्यूट किडनी इंजरी का भी जोखिम रहता है।
न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डेंगू के गंभीर रोग पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर समय पर इसका उपचार न हो पाए तो इससे कई प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डेंगू के गंभीर रोग पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर समय पर इसका उपचार न हो पाए तो इससे कई प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। डेंगू वायरस की न्यूरोट्रॉपिक प्रकृति होती है जिसका मतलब है कि यह सीधे तंत्रिका कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है, जिससे उनमें क्षति और इंफ्लामेशन हो सकती है। इससे इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) जैसे रोगों का भी खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू के इन जोखिमों को भी जानिए
डेंगू के समस्या का अगर समय पर इलाज न हो पाए तो इसके कारण पल्मोनरी एडिमा (फेफड़ों में तरल जमा होना) को जोखिम रहता है। जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
- डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, डेंगू हेमोरेजिक फीवर में फेफड़ों में तरल भरने से ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिर सकता है।
- डेंगू की स्थिति ब्रेडीकार्डिया (दिल की गति धीमी होने) के खतरे को भी बढ़ा सकती है।
- एम्स के एक अध्ययन में पाया गया है कि डेंगू मरीजों में 11-15% मामलों में हृदय से जुड़ी समस्याएं देखी जाती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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