हम सब जानते हैं कि कच्चा दूध कितना फायदेमंद होता है, चाहे वो गाय का हो या भैंस का। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी यही कच्चा दूध नुकसानदायक भी साबित हो जाता है। जी हां, यह बात थोड़ी अटपटी जरूर है, लेकिन 100 फीसदी सच है। अगर मवेशी के थन से कच्चा दूध निकालते समय साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो यह घातक सिद्ध हो सकता है। ऐसा गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर कच्चे दूध के क्या फायदे होते हैं और अगर दूध निकालते समय स्वच्छता का ख्याल न किया जाए तो यह किस प्रकार की बीमारियों को निमंत्रण दे सकता है।
2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैसे तो गाय हो या भैंस, उनका दूध प्राकृतिक तौर पर शुद्ध होता है और फायदेमंद भी। यह हमारे शरीर के लिए सिर्फ तभी नुकसानदायक बन सकता है जब किसी कारण से दूध का संपर्क मवेशी के मल से हो जाता है या फिर थन से दूध निकालते समय किसी तरह की लापरवाही की गई हो, जिससे उसमें कुछ नुकसानदायक तत्व मिल गए हों। या फिर वो मवेशी संक्रमित हो।
3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे संक्रमित कच्चे दूध को पीने से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, दस्त और उल्टियां होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर ये परेशानी गंभीर रूप ले ले तो इंसान को अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है।
4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
अगर कोई इंसान काफी समय तक संक्रमित कच्चे दूध का सेवन करता रहे तो उसे पैरालाइसिस यानी लकवा जैसी गंभीर बीमारी का भी सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ऐसे मामले बहुत कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है।
5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
संक्रमित कच्चे दूध के सेवन से ब्रुसेलोसिस नाम की बीमारी हो सकती है। यह बीमारी संक्रमित मवेशी के दूध पीने या फिर मीट खाने से इंसानों में फैलती है। इसके लक्षण कुछ-कुछ स्वाइन फ्लू जैसे ही होते हैं। इससे ग्रस्त इंसान को बुखार के साथ-साथ काफी ठंड लगती है। साथ ही बहुत अधिक कमजोरी और थकान भी महसूस होती है। इसके अलावा चक्कर आना, बेहोश हो जाना, पीठ में तेज दर्द, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, भूख नहीं लगना और वजन में लगातार गिरावट भी इस बीमारी के लक्षणों में शामिल हैं।