'तुम अपने 20वें साल में हो तो इसका मतलब ये नहीं कि तुम्हें कोई हरा नहीं सकता।' युवाओं में बेफिक्री होना कोई हैरानी की बात नहीं, लेकिन एमी शिरसेल इसे लेकर चेतावनी देती हैं, क्योंकि वो अपने दोस्तों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियम तोड़ते और ग्रुप फोटोज को सोशल मीडिया पर डालते देखती हैं। 22 साल की एमी को कोरोना वायरस हो चुका है। वो इसकी तकलीफों और प्रभावों से गुजर चुकी हैं। इसलिए वो लोगों को कहना चाहती हैं कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए वो नियमों का पालन करें।
Coronavirus: ऐसे लोग दुनिया में ज्यादा फैला रहे हैं कोरोना का संक्रमण, WHO ने दी चेतावनी
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वह कहती हैं, 'वो समय मेरे लिए, मेरे दोस्तों और परिवार के लिए बहुत मुश्किल था।' उन्होंने लक्षण दिखने के 12वें दिन अस्पताल से ही इसे लेकर ट्वीट्स भी किए थे। इस डरावने अनुभव के बाद एमी युवाओं को कोरोना वायरस के खतरे को लेकर जागरुक कर रही हैं, चाहे वो सेहतमंद ही क्यों ना हों। लेकिन, एमी कहती हैं कि वो लोगों को समझा तो रही हैं लेकिन कई लोग बहुत लापरवाह लगते हैं। उन्होंने कहा, ''जब पता चलता है कि मुझसे मिलने आने वाले दोस्त और लोग बिना सावधानी बरते बाहर घूम-फिर रहे हैं तो ये चेहरे पर एक तमाचा जड़ने जैसा लगता है। मेरी उम्र के कई लोग फिर से बार जाना चाहते हैं और दोस्त के साथ ड्रिंक करना चाहते हैं। यह देखना वाकई मुश्किल है।'
क्या नौजवान और उनकी 'पार्टियां' संक्रमण बढ़ा रहे हैं?
इंग्लैंड से लेकर जापान और जर्मनी से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक कई देशों में नौजवानों को कोरोना वायरस के नए मामलों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कई अधिकारियों का कहना है कि इस उम्र के लोग लॉकडाउन में बोर हो गए हैं, इसलिए अब वो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना करते हुए बाहर निकल रहे हैं।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि बड़ी संख्या में नौजवान अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरी भी करते हैं। कई क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें काम शुरू हो गया है, इसलिए नौजवान काम के लिए भी बाहर निकल रहे हैं। इंग्लैंड में ग्रेटर मैनचेस्टर के डिप्टी-मेयर रिचर्ड लीस ने पिछले हफ्ते पत्रकारों से कहा था, 'नौजवानों के कोरोना पॉजिटिव होने के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है।' इसे देखते हुए सरकार ने स्थानीय लॉकडाउन भी लागू किया था। डिप्टी-मेयर रिचर्ड लीस ने कहा था कि शहर में ज्यादातर नए संक्रमण नौजवानों में पाए जा रहे हैं। कई लोग ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे महामारी खत्म हो चुकी है। वो घरों में होने वालीं पार्टियों या गैर-कानूनी रेव पार्टियों में जा रहे हैं।
नौजवानों में बढ़ रहा कोरोना
टोक्यो में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी की एक वजह यह मानी जा रही है कि युवाओं ने अब बार में जाना शुरू कर दिया है। जापान में 20 और 29 साल के लोगों में सबसे ज्यादा संक्रमण पाया गया है। इसी तरह की स्थिति ऑस्ट्रेलिया में भी देखी गई है। अब ऑस्ट्रेलियाई राज्य विक्टोरिया में लोगों को जरूरी कामों को जैसे खाने का सामान, किसी देखभाल, कसरत और काम के लिए बाहर जाने की इजाजत दी गई है। वो भी तब जब ये काम घर से ना हो पाएं। साथ ही रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू भी लगाया गया है।
यूरोप में गर्मियों की छुट्टियां मनाने के लिए पसंदीदा जगहों बार्सेलोना से लेकर उत्तरी फ्रांस और जर्मनी में मामलों में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में स्पेन और जर्मनी ने भी नाइट कर्फ्यू लगा दिया है। फ्रांस मे 15 और 44 साल के लोगों में कोरोना वायरस के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन में यूरोप के लिए रीजनल डायरेक्टर डॉ. हांस क्लूज ने बताया, 'हमें नागरिक और स्वास्थ्य अधिकारियों से रिपोर्ट मिली है कि संक्रमण के नए मामलों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। हालांकि, फिलहाल इसके स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं।' लेकिन, वो कहते हैं कि युवाओं को दोषी ठहराने के बजाए ये सोचना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने की कोशिशों में शामिल कैसे किया जाए।
डॉ. हांस क्लूज कहते हैं, 'वह समझते हैं कि युवा अपनी गर्मियों को यूं ही नहीं जाने देना चाहते। लेकिन, उनकी अपने लिए, अपने माता-पिता और समुदाय के लिए एक जिम्मेदारी भी है। ऐसे में हमें जानना चाहिए कि स्वास्थ्य संबंधी अच्छी आदतों को कैसे अपनाया जाए।'