Urdu Poetry: आज फिर चाय बनाते हुए वो याद आया

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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आज फिर चाय बनाते हुए वो याद आया
आज फिर चाय में पत्ती नहीं डाली मैं ने
- तरुणा मिश्रा

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आधा दाना आधा पागल नईं नईं नईं
उस को पाना है तो पूरा पागल बन
- वरुण आनंद

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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
- साहिर लुधियानवी

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दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए
ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
- कलीम आजिज़

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बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए
हम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते
- मजरूह सुल्तानपुरी

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अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
मैं ज़िंदगी का देते देते सूद ख़त्म हो गया
- फ़रियाद आज़र

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Urdu Poetry: क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

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