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Akbar Allahabadi Shayari: चुनिंदा शेर

उर्दू अदब
                
                                                         
                            हक़ीक़ी और मजाज़ी शायरी में फ़र्क़ ये पाया
                                                                 
                            
कि वो जामे से बाहर है ये पाजामे से बाहर है

वस्ल हो या फ़िराक़ हो 'अकबर'
जागना रात भर मुसीबत है

इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम
वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया आगे पढ़ें

45 मिनट पहले

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