Urdu Poetry: बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग
पड़ता है आसमान का साया ज़मीन पर
- हमदम कशमीरी

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उड़ने वाले गिरे हैं ज़मीं पर सभी
देर तक आसमाँ में रहा कौन है
- अरमान अहमद

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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
- मिर्ज़ा ग़ालिब

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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
- जौन एलिया

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दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
- नासिर काज़मी

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तन्हाई के लम्हात का एहसास हुआ है
जब तारों भरी रात का एहसास हुआ है
- नसीम शाहजहाँपुरी

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Urdu Poetry: कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बद-मिज़ाज सी शाम है

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