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भूकंप को जानने-समझने की नौकरी, क्या आप करना चाहेंगे?

Fri, 12 Jun 2015 07:23 PM IST
Updated Fri, 12 Jun 2015 07:23 PM IST
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भूकंप विज्ञान अपेक्षाकृत एक नया वैज्ञानिक विषय है। हालांकि लोगों की रूचि सैकड़ों वर्षों से भूकंपों के बारे में जानने की रही है, परन्तु एक अध्ययन विषय के रूप में भूकंप विज्ञान का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना है। भूकंप तरंगों को नापने वाले उपकरण सिस्मोमीटर के विकास के साथ ही इस विषय का प्रारंभ माना जाता है।

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बीसवीं सदी के दौरान भूकंप विज्ञान के क्षेत्र का विस्तार हुआ और इसके दायरे में धरती के आंतरिक भाग की जांच को भी शामिल किया गया। भूकंप विज्ञान और भूकंप इंजीनियरी के अंतर्गत भूकंपों और धरती के भीतर से होकर गुजरने वाली तरंगों का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन किया जाता है। इस विषय के अंतर्गत समुद्री भूकंपों, ज्वालामुखियों तथा परत संरचनाओं आदि रूपांतरणों का अध्ययन भी शामिल है।

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कैसे आता है भूकंप

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गौरतलब है कि भूकंप धरती की सतह में अचानक, कभी-कभी तीव्र हलचलों के कारण आता है, जो धरती की पर्पटी में ऊर्जा जारी होने से पैदा होती हैं। भूकंपीय तरंगें धरती के भीतर चट्टानें टूटने से अकस्मात पैदा हुई ऊर्जा की तरंगें होती हैं। भूकंप एक विनाशकारी प्राकृतिक घटना है। भूकंप से होने वाले जोखिम का संबंध मृदा स्थितियों, भूवैज्ञानिक संरचना और संरचनात्मक गतिविधियों के साथ है, जिनका अध्ययन क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है।

भूकंप वैज्ञानिकों का काम भूकंपीय घटनाओं के स्रोत, स्वरूप और आकार का पता लगाना है जिससे विभिन्न एजेंसियों द्वारा उसका इस्तेमाल किया जा सके। भूकंप विज्ञान और भूकंप इंजीनियरी इंटर डिसिप्लिनरी क्षेत्र है, जिनमें भूकंप वैज्ञानिकों के साथ तकनीशियन एवं व्यवसायी भी शामिल होते हैं, जो कम्प्यूटरों, भौतिक विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और सिविल एवं संरचना इंजीनियरी जैसे विषयों में पारंगत होते हैं।

भूकंप वैज्ञानिक और भूकंपों के दुष्प्रभाव से संरक्षण की अपेक्षा करने वाले लोगों के बीच हम भूकंप इंजीनियर को खड़ा पाते हैं, जिसका यह दायित्व है कि वह नए भवनों के निर्माण में इस बात की पुख्ता व्यवस्था करे कि भवनों को भूकंप से नुकसान न हो। उसके काम का संबंध एक तरफ विश्व के विभिन्न भागों में भूकंपों के आकार और आवृत्ति के अनुमान के संदर्भ में भूकंप वैज्ञानिकों के साथ है तो दूसरी ओर वास्तुकारों, योजनाकारों और बीमा कंपनियों के साथ है।

भूकंप विज्ञान और भूकंप इंजीनियरी संबंधी पाठ्यक्रम भूगोल और भौतिक विज्ञान विषयों से मिलकर बनते हैं। चूंकि यह एक वैज्ञानिक क्षेत्र है इसलिए इस क्षेत्र में करियर बनाने हेतु बारहवीं तक भौतिकी तथा गणित विषय होना आवश्यक है। भूकंप विज्ञान और भूकंप इंजीनियरी के पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षाएं भी उत्तीर्ण करनी होती है।

कहां मिलेगा अवसर

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भूकंप विज्ञान और भूकंप इंजीनियरी का कोर्स करने के उपरांत सरकारी संगठनों, एजेंसियों, उद्योग क्षेत्र या विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के अवसर हैं। अगर आप अनुसंधान के क्षेत्र में जाने का निश्चिय करते हैं, तो सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों में प्रचुर अवसर उपलब्ध हैं। अनेक केंद्रीय संस्थानों में भूकंप वैज्ञानिक, भू-वैज्ञानिक, वैज्ञानिक सहायक आदि पदों पर भर्ती की जाती है। इन संस्थानों के अंतर्गत राष्ट्रीय भू-भौतिक अनुसंधान संस्थान, तेल और प्राकृतिक गैस निगम, मौसम पूर्वानुमान विभाग, भारतीय भू सर्वेक्षण विभाग आदि शामिल हैं।
 
भूकंप विज्ञान और भूकंप इंजीनियरी का कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-
:- भूकंप इंजीनियरी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की।
वेबसाइट- www.iitr.ernet.in
:- राष्ट्रीय भूकंप इंजीनियरी सूचना केंद्र, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर।
वेबसाइट- www.iitk.ac.in
:- भू-भौतिकी विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।
वेबसाइट- www.bhu.ac.in
:- वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून।
वेबसाइट- www.himgeology.com
:- मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई। वेबसाइट।
वेबसाइट- www.mu.ac.in

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